रायगढ़। शहर के वार्ड क्रमांक 30 स्थित कैदीमूड़ा में शासकीय भूमि और सार्वजनिक नाले पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि जहां प्रशासन गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी हटाने के लिए पूरा सरकारी लाव-लश्कर लेकर पहुंच जाता है, वहीं रसूखदार कॉलोनाइजरों के सामने अधिकारियों की कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है।
दस्तावेजों के अनुसार 25 मार्च और 13 अप्रैल को एसडीएम, कलेक्टर और जनदर्शन में शिकायत दी गई थी। आवेदन में साफ लिखा गया कि खसरा नंबर 221-1-ख सहित शासकीय भूमि और सार्वजनिक नाले पर कब्जा कर अवैध प्लॉटिंग और निर्माण किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, शिकायत में बारिश के दौरान संभावित जलभराव, बीमारी और जनहानि तक की आशंका जताई गई थी। बावजूद इसके, महीनों बीत जाने के बाद भी नजूल विभाग और नगर निगम की तरफ से कोई बड़ी कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दी।
इस मामले में कलेक्टर कार्यालय से निर्देश जारी हुए, एसडीएम ने भी नजूल अधिकारी को सीमांकन और कार्रवाई के आदेश भेजे, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरा मामला फाइलों में ही दबा दिया गया। इस बीच कथित कॉलोनाइजर द्वारा पक्का निर्माण भी लगभग पूरा कर लिया गया।
मोहल्लेवासियों का कहना है कि ‘अगर यही कब्जा किसी गरीब ने किया होता, तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता। लेकिन यहां बड़े लोगों का मामला है, इसलिए अधिकारी आंखे मूंदे बैठे हैं।’
गरीबों पे सितम रसूखदारों पर रहम !, कैदीमूड़ा में सरकारी जमीन पर बन रही कॉलोनी
कलेक्टर साहब के आदेश को भी ठेंगा, नाले पर अवैध कब्जे का भी लग रहा आरोप



