रायगढ़. शहर सहित राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति में कमी आने लगी है। डीपो से गाडिय़ों की निकासी कम होने के कारण हर दिन दो से चार घंटे के लिए पंपों पर स्टॉक की कमी (सूखे की स्थिति) निर्मित हो रही है। इस समस्या के चलते अब लोग अपने वाहनों की टंकी फुल कराने के लिए सुबह से ही पंपों पर कतारबद्ध नजर आ रहे हैं। यह स्थिति शहर के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर बनी हुई है। वहीं पेट्रोल की अपेक्षा डीजल की आपूर्ति बहुत ही कम हुई है, इससे बोतल व डिब्बों में तेल देना पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि अन्य जिलों की तरह अब रायगढ़ जिले के पेट्रोल पंपों पर सप्लाई पहले की अपेक्षा आधे से भी कम हो गई है, लेकिन खपत आज भी उसी रेसियों में हो रहा है। इसके चलते इन दिनों शहर सहित एनएच किनारे स्थित ज्यादातर पंपों में पेट्रोल की तो ले देकर अपूर्ति हो जा रही है, लेकिन डीजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके चलते अब वाहन चालक इस पंप से उस पंप का चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं। साथ ही इस कमी को देखते हुए अब पेट्रोल पंप संचालक बोर्ड लगाकर लोगों को जानकारी दे रहे हैं कि बोतल व डिब्बों में डीजल-पेट्रोल नहीं दिया जाएगा, साथ ही वाहनों में भी लिमिट में ही दिया जा रहा है, इससे जहां बाइकों में तीन से चार लीटर तक तो कार में 20 से 25 लीटर ही दिया जा रहा है।
इसको लेकर अब लोग चिंतित नजर आने लगे हैं। ऐसे में अब सुबह से ही वाहन चालक पंपों पर अपनी वाहन लेकर कतार में खड़े हो जा रहे हैं। वहीं पंप संचालकों की मानें तो डीपों से कम आवक होने के कारण हर दिन दो-चार घंटे के लिए ड्राई की स्थिति निर्मित हो रही है। हालंाकि अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है कि कोई तेल के बगैर कोई वाहन खड़ी हो लेकिन अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में समस्या बढ़ सकती है। वहीं संचालकों का कहना है कि सीमित स्टॉक होने के कारण वे केवल वाहनों की टंकियों में ही ईंधन भर पा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिल सके। ऐसे में इसका समाधान नहीं होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पडऩे की आशंका है।
आपातकालीन सेवाओं के लिए ‘कंट्रोल’ सप्लाई
ईंधन की कमी को देखते हुए पंप संचालकों ने एक विशेष रणनीति अपनाई है। कई संचालकों ने डीजल का सीमित स्टॉक केवल एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य सरकारी इमरजेंसी वाहनों के लिए सुरक्षित रखा है। सामान्य वाहनों को सीमित मात्रा में ही तेल दिया जा रहा है ताकि स्टॉक को लंबे समय तक चलाया जा सके।
किसानों की बढ़ी चिंता
डीजल-पेट्रोल की इस किल्लत का सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों पर पड़ रहा है। खेती-किसानी के उपकरणों के लिए लोग डिब्बों में डीजल ले जाते थे, लेकिन अब रोक लगने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। पंप संचालकों का कहना है कि ऊपर से ही सप्लाई कम है, ऐसे में वे चाहकर भी सबकी मदद नहीं कर पा रहे हैं। इससे अब किसानों के फसल को भी नुकसान हो सकता है। वहीं किसानों का कहना है कि इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के चलते फसल में पर्याप्त पानी की जरूरत पड़ रही है, लेकिन डिब्बा में डीजल नहीं मिलने के कारण काफी दिक्कत हो रही है।



