रायगढ़।कहते हैं कि जब विकास की गंगा बहती है, तो हर घर तक पानी पहुँचता है, लेकिन ग्राम पंचायत बगचबा में तो लगता है गंगा रास्ता ही भूल गई!
यहाँ प्रधानमंत्री नल जल योजना के तहत पाइप तो बिछ गए, नल भी लग गए, फोटो भी खिंच गए कृ बस पानी ही गायब है।ग्रामीणों का कहना है कि नल से पानी नहीं, हवा और वादे निकलते हैं।
सुबह-सुबह महिलाएं नल खोलती हैं, और फिर आसमान की तरफ देखती हैं, शायद ऊपर से ही पानी बरस जाए!योजना के बोर्ड पर मोटे अक्षरों में लिखा है ‘हर घर जल’, लेकिन हकीकत में यह नारा बदलकर हो गया है ‘हर घर छल’।
ग्राउंड रियलिटी अे कागजी हकीकत जहाँ कागजों में 100 प्रतिशत काम पूरा दिखाया गया है, वहीं जमीन पर पाइपलाइन अधूरी, टंकियां सूखी और नल शोपीस बने खड़े हैं। कुछ जगहों पर तो पाइप ऐसे बिछे हैं जैसे किसी ने लूडो खेलते-खेलते लाइन खींच दी हो। ग्रामीणों की पीड़ा, अफसरों की चुप्पीगांव के बुजुर्ग कहते हैं-पहले कुएं से पानी लाते थे, अब नल से उम्मीद लाते हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी बता रही है कि शायद सब कुछ योजना अनुसार ही चल रहा है या फिर बहुत अच्छे से मैनेज हो गया है।
भ्रष्टाचार का बहता पानी ग्रामीणों का आरोप है कि इस योजना में पानी कम और पैसे ज्यादा बहाए गए हैं। टंकी का निर्माण अधूरा, पाइपलाइन कमजोर, और काम की गुणवत्ता ऐसी कि पहली ही बारिश में सच्चाई बहकर बाहर आ गई।
सबसे बड़ा सवाल जब सरकार हर घर तक पानी पहुंचाने की बात कर रही है, तो बगचबा में यह योजना हर घर तक निराशा क्यों पहुँचा रही है? अब देखना यह है कि जिम्मेदार जागते हैं या फिर नल से पानी आने का इंतजार करते-करते गांव वाले ही ‘सूख’ जाते हैं।
घरघोड़ा के बगचबा में नल जल योजना का कमाल
कागजों में पानी ही पानी, हकीकत में टोटियां सुखी



