रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल में टिकट चेकिंग अभियान के दौरान डुप्लीकेट एमएसटी (मंथली सीजन टिकट/छमाही पास) बनाकर यात्रा करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है।
दुर्ग स्टेशन पर किलाबंदी टिकट चेकिंग के दौरान 4 छात्रों को पकड़ा गया, जो मोबाइल ऐप की टिकट इमेज का दुरुपयोग कर फर्जी एमएसटी के जरिए यात्रा कर रहे थे। मामले में एक अन्य छात्र के टिकट बेचने में शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है, जिसकी तलाश जारी है।
रेलवे अधिकारियों के निर्देश पर ट्रेन संख्या 68705 रायपुर-डोंगरगढ़ लोकल में विशेष टिकट जांच अभियान चलाया गया। इसी दौरान दुर्ग में वरिष्ठ टिकट एग्जामिनर प्रिया ने एक यात्री के पास संदिग्ध एमएसटी टिकट पाया। गहन जांच में यह टिकट डुप्लीकेट निकला। पूछताछ आगे बढ़ी तो पूरा नेटवर्क सामने आया। जांच में पता चला कि यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप से जारी एमएसटी टिकट की इमेज का दुरुपयोग कर उसकी डुप्लीकेट कॉपी बनाई जा रही थी और उसी के जरिए यात्रा की जा रही थी।
शंकराचार्य कॉलेज के 4 छात्र शामिल
जांच में शंकराचार्य कॉलेज के चार छात्र इस फर्जीवाड़े में शामिल पाए गए। पकड़े गए छात्रों में कुलदीप बिश्नोई (20), यू ओंकार (20), अखिलेश साहू (19), राहुल साहू (20) शामिल हैं। मुख्य आरोपी कुलदीप ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने फर्जी टिकट तैयार किया और इसे अपने दो साथियों के साथ साझा किया, जिन्होंने इसे आगे प्रसारित किया। पूछताछ में हर्ष नाम के एक अन्य छात्र का नाम सामने आया है, जो इन फर्जी टिकटों को अन्य यात्रियों को बेचने में शामिल बताया गया है। फिलहाल वह पकड़ में नहीं आया है। रेलवे ने उसकी तलाश शुरू कर दी है।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुई पूछताछ
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश कुमार त्रिवेदी के निर्देश पर सहायक वाणिज्य प्रबंधक (कोचिंग) अविनाश कुमार आनंद, मुख्य वाणिज्य निरीक्षक जितेंद्र प्रसाद, टाटा बाबू राव, अभिजीत डे, डिविजनल सीटीआई ए. जेना, सीटीआई जयंत बाघ और चेकिंग स्टाफ ने संदिग्धों से गहन पूछताछ की। चारों छात्रों को आगे की कार्रवाई के लिए आरपीएफ दुर्ग को सौंप दिया गया है।
रेलवे ने यात्रियों से की अपील
रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे टिकट केवल अधिकृत माध्यमों रेलवे टिकट काउंटर, यूटीएस ऑन मोबाइल, ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन, टिकट सुविधा केंद्र और रेलवन ऐप से ही लें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति से टिकट या एमएसटी खरीदने से बचें। रेलवे अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस खुलासे के बाद टिकट चेकिंग और सख्त की जाएगी और डिजिटल टिकटों के दुरुपयोग पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। यह मामला रेलवे सुरक्षा और टिकटिंग सिस्टम में फर्जीवाड़े के नए तरीके को भी उजागर करता है।



