राकेश कुमार शर्मा/ गाजियाबाद। प्रणामी संप्रदाय का मूलभूत सिद्धांत प्रेम और सेवा है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए श्री कृष्ण प्रणामी निजानंद आश्रम, राजनगर एक्सटेंशन (गाजियाबाद) में 17 से 19 अप्रैल 2026 तक बारहवां तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुंदरसाथ के मध्य प्रेमभाव, एकता और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का सशक्त माध्यम बना।
विधि-विधान के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान एवं श्री 5 पारायण पाठ की पधरावनी के साथ हुआ। प्रात:कालीन बेला में आयोजित पूजा-अर्चना में आश्रम के महंत एवं संचालक बाल योगी, सिद्ध पुरुष, महात्मा श्री सुदीप चन्द्र जी महाराज (करुणामयी व्यक्तित्व एवं समाज सेवा में अग्रसर) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ विदुषी परीमसखी जी महाराज (शक्तिनगर, दिल्ली), शेरपुर धाम से श्री राजकुमार पालीवाल, श्री 5 पद्मावती पुरी धाम, पन्ना से पधारे पुजारी पवन शर्मा, विद्वान एवं हिमांशु शर्मा, विदुषी श्रीमती अर्चना शर्मा, श्रीमती प्रभात त्रिपाठी (भजन गायिका) सहित अनेक संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसके साथ ही श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेश शर्मा, सचिव प्रेम शर्मा, ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी राकेश कुमार शर्मा, दिनेश कुमार शर्मा, प्रमोद कुमार शर्मा तथा सतना से देवेंद्र प्रणामी (भोलू भाई) सहित पन्ना धाम से भाजपा नेता अल्पेश शर्मा,आनंद शर्मा (मोहित), लोकेश शर्मा एवं देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सुंदरसाथ उपस्थित रहे।
महंत उपाधि से अलंकृत व्यक्तित्व
महात्मा सुदीप चन्द्र महाराज का करुणामयी, मिलनसार एवं सेवा-प्रधान व्यक्तित्व संप्रदाय में विशेष स्थान रखता है। उन्हें श्री निजानंद संप्रदाय के प्रमुख तीर्थ श्री 5 पद्मावती पुरी धाम, पन्ना स्थित अनंत श्री प्राणनाथ जी मंदिर के धर्म संसद, बगला जी मंदिर में श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट, विद्वान-विदुषी जन, मंदिर के पुजारी एवं साधु-संतों तथा विशाल सुंदरसाथ की उपस्थिति में महंत की उपाधि से अलंकृत किया गया था। यह सम्मान उनके सनातन धर्म और श्री कृष्ण प्रणामी धर्म के प्रति समर्पण, सेवा-भाव और आध्यात्मिक नेतृत्व का जीवंत प्रमाण है।
विशिष्ट संत-महात्माओं एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
तीन दिवसीय वार्षिक महोत्सव कार्यक्रम में देशभर से पधारे संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों एवं विशिष्ट अतिथियों की उल्लेखनीय पस्थिति रही, जिनमें— श्री श्री 108 श्री दिलीप दास जी महाराज (राष्ट्रीय अध्यक्ष, रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट, अयोध्या धाम), श्री श्री 108 आनंद स्वरूप सरस्वती (अध्यक्ष, शंकराचार्य परिषद), श्री श्री 108 अमृतानंद शंकराचार्य (सर्वज्ञ शारदा पीठ, जम्मू-कश्मीर), श्री श्री 108 चितेश्वरा नंद महाराज जी (श्रीधाम मथुरा), पिंकी चौधरी (उत्तराखंड), के.पी. मलिक (राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश), दीपक सोम (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन), नंदकिशोर जी (विधायक, लोनी क्षेत्र), श्रीकांत त्यागी (अध्यक्ष, राष्ट्रीय नव निर्माण दल), राकेश टिकैट (राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन), पं. सतीश (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रवादी सवर्ण महासंघ) उपस्थित रहे। प्रशासनिक क्षेत्र से— एल. शुक्ला (पूर्व आईएएस), सूर्यकुमार शुक्ला (पूर्व डीजीपी), अरुण कुमार द्विवेदी (पूर्व एडिशनल कमिश्नर, जीएसटी), श्रीमती राखी द्विवेदी (लेक्चरार), श्री प्रभाश श्रीवास्तव (पूर्व आईएएस) विशेष रूप से उपस्थित रहे।
प्रवचन और भजन-संध्या बनी मुख्य आकर्षण
उत्सव का प्रमुख आकर्षण प्रवचन एवं भजन-संध्या रही, जिसमें संत-महात्माओं एवं विद्वानों ने धर्म, नैतिकता, मानवता और सामाजिक समरसता पर अपने विचार व्यक्त किए। भजनों और कीर्तन की मधुर प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
ट्रस्ट एवं आयोजन समिति की सराहनीय भूमिका
श्री निजानंद आश्रम श्री कृष्ण प्रणामी धाम के ट्रस्ट एवं पदाधिकारियों में सुनील कुमार माहेश्वरी (उपाध्यक्ष), श्रीमती अर्चना त्यागी (उपाध्यक्ष), संजय कुमार शर्मा (महासचिव), अमित कुमार (सह सचिव), अभय कौशिक (कोषाध्यक्ष), अंकुर त्यागी (संगठन मंत्री), राजकुमार पांचाल (प्रचार मंत्री) तथा सदस्यगण गौरव माहेश्वरी, कुलदीप त्यागी, संजय त्यागी, श्रीकांत पटेल सहित समस्त सुंदरसाथ की सक्रिय भूमिका रही, जिनमें प्रधानाचार्य योगेश त्यागी, कृष्ण कुमार शर्मा, योगेश प्रजापति, राकेश प्रजापति, वीरेंद्र गोयल, मनोज शर्मा प्रमुख रूप से अपनी सेवाएं देते रहे।
सेवा भाव से समर्पित रहे
मुख्य भूमिका निभाने वालों में संजय पांचाल, राजकुमार पांचाल, रोहित पांचाल, सचिन पांचाल, राहुल प्रजापति, आकाश सोम एवं अंकुर शामिल रहे। श्याम सुंदर त्यागी (छोटू) ने आश्रम प्रशासन का दायित्व संभाला, जबकि अंकुर त्यागी ने प्रशासन एवं संगठन से संबंधित व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संचालित किया। उक्त सभी श्रद्धालु सुंदरसाथ पूर्ण निष्ठा भाव के साथ तीन दिवसीय कार्यक्रम में रात दिन अपनी भागीदारी तन मन धन से की। कार्यक्रम में आए हजारों श्रद्धालुओं ने उनकी सेवाओं की तारीफ करते हुए उनकी सेवाओं को देखकर अपना शुभ आशीष दिया।
श्रद्धा, सेवा और समर्पण का उत्सव
यह तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अनुपम उदाहरण बनकर उभरा। इस आयोजन ने आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हुए सभी के हृदय में अमिट छाप छोड़ी।







