सारंगढ़। रक्षक ही भक्षक बन जाए और कानून के रखवाले माफियाओं के मैनेजर, तब जनता को सडक़ पर उतरना ही पड़ता है। सारंगढ़ के फर्सवानी में आज जो हुआ, वह जिला प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा है। यहाँ की महिला ने हाथों में डंडे लेकर पुलिस, आबकारी और मौन बैठे पं. प्रतिनिधियों के खिलाफ जो मोर्चा खोला है, उसने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी, ?फर्सवानी की स्थिति यह है कि – यहाँ विकास की किरण पहुँचे न पहुँचे, लेकिन अवैध महुआ शराब की धार हर गली में पहुँच चुकी है। मात्र 30-40 रुपये के पाव के लालच में तस्कर (शराब कोचिया ) गाँव के युवाओं को नशे की गर्त में धकेल कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। सवाल यह है कि – क्या यह अवैध कारोबार पुलिस जिला आबकारी विभाग की मौन सहमति के बिना संभव है ? क्या विभाग के अधिकारी इतने अंधे हो गए हैं कि उन्हें गाँव-गाँव धधकती अवैध भ_ियां दिखाई नहीं देतीं ग्रामीणों ने सीधे तौर पर पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों पर संरक्षण और हिस्सा लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जनता पूछ रही है क्या सरपंच, उपसरपंच और पंचों की जानकारी के बिना गाँव में दर्जनों ‘महुआ बार’ चल सकते हैं? ?क्या वोट बैंक की गंदी राजनीति या महीने के लालच ने जन प्रतिनिधियों के जमीर को मार दिया है? ?ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ पंचायत कर्मी बकायदा तस्करों से अपना हिस्सा वसूलते हैं। यदि यह सच है, तो यह भ्रष्टाचार निवारण अधि नियम के तहत सीधा अपराध है, ?महिलाओं का सबसे तीखा प्रहार स्थानीय पुलिस पर है। आरोप है कि पुलिस तस्करों को पकड़ती तो है, लेकिन थाने लाकर उन्हें ससम्मान छोड़ दिया जाता है। यह पकड़ो और छोड़ो का खेल तस्करों के हौसले बुलंद कर रहा है। थाने से वापसी के बाद ये अपराधी और भी दबंगई से शराब बनाते हैं व शिकायत कर्ताओं को धमकाते हैं। महिलाओं का कहना है क्या पुलिस प्रशासन तस्करों के आगे नतमस्तक हो चुका है?
जहाँ पुरुष प्रधान समाज और पंचायत प्रतिनिधि चुप्पी साधे बैठे हैं, वहीं फर्सवानी की इन साहसी महिलाओं ने समाज को बचाने का बीड़ा उठाया है। मितानिन सुनीता साहू, सक्रिय सदस्य हर्ष साहू, पशु सखी द्वितीया यादव, और गायत्री साहू समेत ?अन्य सक्रिय महिलाएं सुखो साहू, गंगाबाई साहू, हेमा पटेल, शांति साहू, सरस्वती सिदार, पुष्पा सिदार, संगीता सिदार, सोनी सिदार, संतोषीनी खडिय़ा, द्वितीया कलाबाई साहू, वृन्दकुंवर पटेल, बसंता खडिय़ा, कुमारी सिदार, दिल कुमारी यादव, हीरामोती यादव, हीरामोती साहू, कचरा सारथी, सुशीला सिदार, फुलबाई यादव सहित दर्जनों महिला ने जो साहस दिखाया है, वह काबिले तारीफ है। ?
इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि वे केवल चूल्हा-चौका ही नहीं संभालतीं, बल्कि जब बात बच्चों के भविष्य और समाज की सुरक्षा पर आती है, तो वे चंडी का रूप धरकर भ्रष्ट तंत्र की ईंट से ईंट बजाना भी जानती हैं। इन रणचंडियों का यह आक्रोश दरअसल प्रशासन की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है। प्रशासन को सीधी चेतावनी, अब आर – पार की जंग! ?महिला समूह ने नारी शक्ति जिंदाबाद और नशा मुक्त कराना है के नारों के साथ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन अवैध भ_ियों पर बुलडोजर नहीं चला, संलिप्त अधिकारियो पर गाज नहीं गिरी, तो यह आंदोलन उग्र होगा शासन क्या तस्करों के खिलाफ धारा 34 (2) जैसी सख्त कार्यवाही कर पायेगी या हाथ कांपेगें जिपं क्या दोषी पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों की जाँच कर उन्हें बर्खास्त कर पायेगी ?? अब देखना यह है कि – फर्सवानी के महिलाओं की ललकार के बाद सारंगढ़ प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर इन तस्करों की दबंगई और प्रशासन की जुगलबंदी यूँ ही फर्सवानी को श्मशान बनाती रहेगी।
एसपी साहब बचा लो, नारीयों ने लगाई गुहार
नारी शक्ति ने अवैध शराब बिक्री के खिलाफ खोला मोर्चा



