रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शाह ने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार किसी पर गोली चलाना नहीं चाहती, सभी माओवादी हथियार डाल दें। उनके लिए रेड कार्पेट बिछाकर हम उनका स्वागत करेंगे। शाह ने आगे कहा कि जहां कम्यूनिस्ट शासन में रहे वहां विकास नहीं कर पाए। जब हमनें आदिवासियों के कल्याण की बात की, वहां भी अंधकार फैला दिए। विचारधारा ही विनाश की घातक विचारधारा है। बहुत जरूरी है कि देश इस विचारधारा से निजात पा ले।
अमित शाह ने आगे कहा कि कम्यूनिस्ट वैसे तो डेमोक्रेटिक पॉलिटिक्स में बचे भी नहीं है, दूरबीन लेकर देखना पड़ता है, एक केरल बचा है, यहां भी इस बार समाप्त हो जाएगा। बता दें कि अमित शाह 3 दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे हैं। जहां वे राजधानी रायपुर के मेफेयर होटल में नक्सलवाद पर हाईलेवल मीटिंग ले रहे हैं। बैठक के पहले सेशन में इंटेलिजेंस इनपुट्स और विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा हुई। शाह ने एक्स जानकारी शेयर करते हुए लिखा कि-आज रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार और अधिकारियों के साथ नक्सलविरोधी अभियानों पर समीक्षा बैठक की। सिक्योरिटी सेंट्रिक स्ट्रेटजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम आए हैं।
इस 31 मार्च से पहले नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो रहा है। शाह ने आगे लिखा- जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास का पर्याय बन चुका है। यहां के युवा स्पोर्ट्स, फॉरेंसिक और टेक्निकल एजुकेशन को गति देते हुए अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं। दूसरे सेशन में नक्सल प्रभावित इलाकों की स्थिति पर चर्चा हो रही है। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, कई प्रदेशों के डीजीपी सहित एसीएस गृह, सीआरपीएफ और कई अन्य सैन्य सुरक्षा के डीजीपी शामिल हुए हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सली खात्मे की डेडलाइन को 51 दिन बचे हैं। ऐसे में यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर केंद्र सरकार की रणनीति से जुड़े अहम दौर की शुरुआत हो रही है। अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन अब नजदीक आ चुकी है। इस समयसीमा का ऐलान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल लगातार अभियान चला रही है। इस डेडलाइन में अब करीब 51 दिन का ही समय बाकी है। अमित शाह बस्तर में पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इससे पहले वे 28 से 30 नवंबर तक नवा रायपुर स्थित आईआईएम परिसर में आयोजित 60वें डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन में पहुंचे थे। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने मीटिंग को लेकर कहा कि नक्सलवाद को लेकर 31 मार्च 2026 से पहले संभवत: ये आखिरी बड़ी बैठक होगी। आने वाले समय में कैसे काम करना है, बड़े स्तर पर निर्णय लेने की रणनीति निर्धारित होगी।
गृहमंत्री अमित शाह इस दौरे से पहले 13 दिसंबर 2025 को जगदलपुर पहुंचे थे। जहां वे बस्तर ओलंपिक समापन समारोह में शामिल हुए थे। इसके अलावा शाह ने नक्सल अभियान में जुड़े अफसरों से मुलाकात की थी। अभियानों की समीक्षा कर सुरक्षाबलों की गतिविधियों की जानकारी भी ली थी। राज्य स्तर पर अमित शाह के दौरे को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही तैयारियों में जुटी हैं। रायपुर में प्रस्तावित बैठक को लेकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन और ज्यादा तेज किए जा सकते हैं। इस तरह कुल मिलाकर अमित शाह का यह दौरा सिर्फ एक नियमित समीक्षा नहीं, बल्कि नक्सलवाद के खिलाफ तय समयसीमा से पहले आखिरी रणनीतिक बैठक के रूप में देखा जा रहा है। जिसका असर आने वाले महीनों में जमीनी हालात पर साफ दिख सकता है।
सरकार किसी पर गोली चलाना नहीं चाहती : अमित शाह
कहा- माओवादी हथियार डाल दें, रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेंगे



