पखांजूर। विष्णुपुर गांव में लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) द्वारा कराए गए पुलिया निर्माण ने विभागीय कार्यप्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग 119.85 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार की गई यह पुलिया निर्माण के महज एक वर्ष के भीतर ही जर्जर अवस्था में पहुंचने लगी है। पुलिया के बीचों-बीच और साइड की दीवारों में पड़ी गहरी और लंबी दरारें यह साफ संकेत दे रही हैं कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों और गुणवत्ता नियमों की अनदेखी की गई है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया में आई दरारें सामान्य नहीं हैं, बल्कि यह घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाहीपूर्ण कार्य का परिणाम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुलिया को वर्षों तक क्षेत्रवासियों की आवाजाही का सहारा बनना था, वह आज खुद अपनी मजबूती की लड़ाई लड़ रही है।
पुलिया निर्माण का कार्य मेर्स लक्ष्मी अभिषेक इंटरप्राइजेस एल.एल.पी. द्वारा कराया गया था। आरोप है कि निर्माण के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी कार्यों में नियमों को ताक पर रखा गया। विशेषकर साइड ब्लॉक पिचिंग जैसे जरूरी कार्य में गंभीर अनियमितता सामने आई है। नियमों के अनुसार जहां ईंट या ब्लॉक से पिचिंग किया जाना था, वहां सिर्फ मिट्टी के ऊपर हल्की ढलाई कर खानापूर्ति की गई।
स्थिति और भी चौंकाने वाली तब हो जाती है जब ग्रामीण बताते हैं कि अब भुगतान निकालने के उद्देश्य से ढलाई पर कृत्रिम निशान बनाए जा रहे हैं, ताकि कागजों में कार्य को मानकों के अनुरूप दिखाया जा सके। यानी, ज़मीन पर कमजोर निर्माण और फाइलों में मजबूत काम दर्शाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विष्णुपुर जैसे अंदरूनी और ग्रामीण क्षेत्र का लाभ उठाकर ठेकेदार ने घटिया सामग्री का खुलकर उपयोग किया, वहीं संबंधित विभाग की ओर से समय पर निरीक्षण, तकनीकी जांच और सख्त कार्रवाई का अभाव साफ दिखाई देता है। यदि निर्माण के दौरान नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता जांच होती, तो करोड़ों रुपये की यह सार्वजनिक संपत्ति इतनी जल्दी जर्जर न होती।
सबसे गंभीर बात यह है कि कंपनी के ठेकेदार द्वारा गुणवत्ताहीन निर्माण की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी ठोस विभागीय कार्रवाई की खबर है और न ही उच्चस्तरीय जांच की घोषणा। इससे विभागीय जवाबदेही पर और अधिक प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच, दोषी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई, और पुलिया की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
विष्णुपुर पुलिया का यह मामला न सिर्फ एक निर्माण की कहानी है, बल्कि यह सरकारी तंत्र में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा भी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि लोक निर्माण विभाग इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता और सख्ती दिखाता है, या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।
कागज़ों में मजबूत, ज़मीन पर कमजोर, विष्णुपुर पुलिया निर्माण में गुणवत्ता और निगरानी की परतें उधड़ीं
विष्णुपुर में करोड़ों की पुलिया बनी भ्रष्टाचार की मिसाल, कागजों में मजबूत, ज़मीन पर कमजोर, विष्णुपुर पुलिया निर्माण में बड़ा खेल उजागर



