रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की निर्धारित समय-सीमा किसानों के लिए गंभीर संकट का कारण बनती जा रही है। धान खरीदी ऑपरेटरों एवं सैम्प्स प्रबंधकों के आंदोलन, बेमौसम बारिश और तकनीकी व प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के चलते बड़ी संख्या में किसान समय पर पंजीकरण नहीं करा सके, जिससे हजारों किसान समर्थन मूल्य पर अपनी पूरी धान बिक्री से वंचित रह गए हैं। धान बिक्री में हो रही इस देरी का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। खेती के लिए किसानों ने बैंकों और निजी साहूकारों से ऋण लेकर उत्पादन किया है। समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के बाद ही किसान कृषि ऋण चुकाते हैं, लेकिन खरीदी समय-सीमा समाप्त होने की स्थिति में किसान कर्ज अदायगी में असमर्थ हो सकते हैं। इससे किसानों के साथ-साथ बैंकिंग व्यवस्था पर भी दबाव बढऩे की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि गिरदावरी में त्रुटियाँ और प्रशासनिक बाधाएँ उनकी मजबूरी को और बढ़ा रही हैं। ऐसे में समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब पट्टाधारी सभी किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करते हुए पंजीकृत किसानों की पूरी-पूरी धान खरीदी की जाए। इसी मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी पखांजूर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने की अपील की गई है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार समय रहते निर्णय लेकर उन्हें आर्थिक संकट से उबारने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।



