सारंगढ़ बिलाईगढ़। जिला 60 प्रतिशत वनों से घिरा हुआ है। आकाश से बातें करती हुई साल सागौन और बीजा के वृक्ष तो दूसरी ओर बादलों से अटखेलियां खेलती हुई पहाड़ जिसकी सुरक्षा वन विभाग के हाथ में है लेकिन वन विभाग के नुमाइंदे कर्तव्य परायणता को त्याग कर भ्रष्टाचार के साथ गल बहिया खेल रहे है। उजड़ते हुए वन, संरक्षित वन में बनती प्रधानमंत्री आवास, सारंगढ़ वन मंडल के रक्षक गांधी की तीन बंदर की तरह आंख, कान व मुंह बंद कर कंबल ओढ़ कर घी पी रहे हैं। जिसके चलते आरक्षित वनों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 23 जनवरी 2026 को आरक्षित वन खण्ड, कक्ष क्रमांक 442, सर्किल गाताढ़ी, वन परिक्षेत्र बिलाईगढ़ में बड़े पैमाने पर अवैध वृक्ष कटाई का गंभीर मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरक्षित वन क्षेत्र में विनिर्दिष्ट (संरक्षित) प्रजाति के कुल 46 नग हरे-भरे इमारती वृक्षों को अवैध रूप से काटा गया, जिनकी गोलाई 50 सेंटीमीटर से लेकर 160 सेंटीमीटर तक बताई जा रही है। सूचना ग्रामीणों द्वारा दिए जाने के बावजूद वन परिक्षेत्राधिकारी काफी देर बाद मौके पर पहुंचे, जबकि – बीट गार्ड उनके पहुँचने के कुछ समय बाद घटनास्थल पर पहुँचा। मौके की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि – आरोपी चेन सॉ मशीन की सहायता से सुनियोजित तरीके से कटाई कर रहे थे। इतना ही नहीं, कटे हुए वृक्षों के परिवहन के लिए ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन भी मौके पर मौजूद थीं, जिससे यह साफ होता है कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संगठित अवैध गतिविधि का हिस्सा था। जिसमें सेन्हा वृक्ष 1.10 सीएम, धौवड़ा 60 सीएम, धौवड़ा 88 सीएम, चार 86 सीएम, घाटा 82 सीएम, वीजा 105 सीएम, धवड़ा 85 सीएम, धवड़ा 68 सीएम, धौवड़ा 67 सीएम, साजा 116 सीएम, धवड़ा 104 सीएम, साजा 112 सीएम, साजा 84 सीएम, धवड़ा 98 सीएम साजा 70 सीएम, सेन्हा 97 सीएम, सेंन्हा 100 सीएम, सेन्हा 70 सीएम, धवड़ा 118 सीएम, धवड़ा 95 सीएम, सेन्हा 70 सीएम, धवड़ा 130 सीएम सेंन्हा 85 सीएम, सेंन्हा 86 सीएम, साजा 150 सीएम की गोलाई रही है।
यह घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है, बल्कि इस बिलाईगढ़ क्षेत्र में लगातार हो रही अवैध कटाई की एक और कड़ी है। हाल ही में बिजली विभाग द्वारा बिना अनुमति 52 से अधिक वृक्षों की कटाई किए जाने का मामला भी सामने आया था। इस पर संज्ञान लेते हुए जिले सारंगढ़ बिलाईगढ़ के डीएफ ओ विपुल अग्रवाल द्वारा बिजली विभाग के अधिकारियों को पत्र जारी किया गया, जिसके बाद विभाग में हडक़ंप मच गया है। लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि – या तो वनविभाग का निगरानी तंत्र कमजोर हो चुका है, या फिर अवैध कटाई करने वालों को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है। पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में कड़ी से कड़ी कानूनी कार्यवाही, दोषी अधिकारी व कर्मचारियों पर जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या आरक्षित वनों की सुरक्षा केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रह गई है, या वन संपदा को बचाने के लिए वास्तव में ठोस और सख्त कदम उठाए जाएंगे ?
ध्यान देने की बात यह है कि – क्या यह सिर्फ जंगली वृक्षों की तस्करी है या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश काम कर रही है। इसे देखना भी निहायत जरूरी है। क्यों कि – इन वृक्षों की तस्करी करने वाला जिस मंशा से वृक्षों की कटाई कर रहा है उसके साथ ही साथ उस भू – भाग को जेसीबी के माध्यम से प्लेन कर रहा है? तो तय है कि – कुछ दिन बाद उसे खेत का स्वरूप या फिर प्रधानमंत्री आवास के तहत आवास स्वीकृत करवा जंगल के इस बेशकीमती जमीन पर मालिकाना हक जमा, शासन से पट्टा स्वीकृत करवा लेगा ?शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए यें वनीय तस्कर जंगल से वृक्षों की सफाया कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि – डीएफओ विपुल अग्रवाल क्या कार्यवाही करते हैं? या फिर यह गंभीर मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
आरक्षित वनों की सुरक्षा फिर सवालों के घेरे में
एक तरफ कट रहे वन तो दूसरी ओर बन रहे आवास



