रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 23 जनवरी 2026 से पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने जा रहा है। इसे लेकर प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। गृह विभाग द्वारा अगले दो-एक दिनों में पुलिस कमिश्नरेट से जुड़ा अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी किए जाने की संभावना है। नोटिफिकेशन जारी होते ही राज्य सरकार सबसे पहले आईजी स्तर के अधिकारी को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के रूप में नियुक्त करेगी, जिन्हें 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नर के पद पर अपग्रेड किया जाएगा।
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने से पहले ओएसडी की नियुक्ति इसलिए की जाती है ताकि नए सिस्टम से जुड़ी प्रशासनिक, तकनीकी और लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जा सकें। ओएसडी को पुलिस कमिश्नर कार्यालय का पूरा सेटअप तैयार करना होगा। इसमें कार्यालय भवन, फर्नीचर, स्टाफ, प्यून, ड्राइवर, वाहन, आईटी सिस्टम और अन्य संसाधनों की व्यवस्था शामिल है। इसके अलावा, 23 जनवरी को पुलिस कमिश्नरेट की औपचारिक शुरुआत के अवसर पर एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी भी ओएसडी को सौंपी जाएगी। जानकारी के मुताबिक 22 जनवरी को ओएसडी को ही पुलिस कमिश्नर बनाए जाने का आदेश जारी कर दिया जाएगा, ताकि अगले दिन बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सिस्टम लागू हो सके।
रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर को लेकर बीते एक महीने से पुलिस और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। पब्लिक डोमेन में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा रही, उनमें— अजय यादव (आईजी, पुलिस मुख्यालय) बद्रीनारायण मीणा अमरेश मिश्रा (आईजी, रायपुर) संजीव शुक्ला (आईजी, बिलासपुर) अभिषेक शांडिल्य (आईजी, राजनांदगांव) दीपक झा (आईजी, सरगुजा) शामिल हैं। वहीं, पुलिस कमिश्नरेट में सेकेंड लेफ्टिनेंट यानी ज्वाइंट कमिश्नर के लिए कई डीआईजी और हाल ही में प्रमोट हुए एसएसपी के नामों पर भी विचार किया जा रहा है।
एनपीजी न्यूज को मिले सूत्रों के अनुसार, सरकार के भीतर दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है। उनके साथ बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला, राजनांदगांव आईजी अभिषेक शांडिल्य और सरगुजा आईजी दीपक झा के नामों पर भी मंथन हुआ, लेकिन फिलहाल रामगोपाल गर्ग का पलड़ा भारी माना जा रहा है। रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा को भी पुलिस कमिश्नरेट के लिए बेस्ट चॉइस माना जा रहा था, लेकिन उनके पास ईओडब्लू और एसीबी में चल रहे कई अहम और संवेदनशील केस होने के कारण सरकार उन्हें अभी वहां से हटाने के मूड में नहीं है।
पंजाब में जन्मे रामगोपाल गर्ग 2007 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने करीब 7 साल सीबीआई में सेवाएं दी हैं, जिनमें अधिकांश समय वे चंडीगढ़ में सीबीआई एसपी के रूप में पदस्थ रहे। उनकी छवि एक ईमानदार, सख्त और प्रोफेशनल अधिकारी की मानी जाती है। पुलिसिंग के नियम-कायदों पर उनकी मजबूत पकड़ है और सरकार व पुलिस मुख्यालय दोनों के साथ उनकी बेहतर ट्यूनिंग मानी जाती है। सूत्रों के मुताबिक, सत्ता के अंदरखाने में उनके नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि रायपुर के अंतिम एसएसपी लाल उमेद सिंह को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बनाया जा सकता है। वे हाल ही में डीआईजी प्रमोट हुए हैं। हालांकि, इस पद पर आने के बाद उनका कार्यक्षेत्र सीमित होकर सिर्फ सिटी एरिया तक रह जाएगा। लाल उमेद सिंह पहले रायपुर में एडिशनल एसपी और फिर एसएसपी रह चुके हैं। शहर की भौगोलिक और सामाजिक संरचना की उन्हें गहरी समझ है। चूंकि रामगोपाल गर्ग पहले कभी रायपुर में पोस्ट नहीं रहे, इसलिए प्रशासनिक संतुलन के लिहाज से लाल उमेद सिंह को उनके साथ रखा जा सकता है।
रामगोपाल गर्ग का करियर छत्तीसगढ़ में काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। गरियाबंद उनका पहला जिला रहा, इसके बाद वे कोरिया और बालोद में एसपी रहे। पिछली सरकार में उन्हें सरगुजा रेंज का आईजी बनाया गया, लेकिन बाद में डिमोशन कर रायगढ़ डीआईजी रेंज भेज दिया गया। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें दुर्ग का एसएसपी बनाया गया, जहां वे डीआईजी रहते हुए कप्तान रहे और वर्तमान में वहीं आईजी के पद पर पदस्थ हैं। सीबीआई में रहते हुए रामगोपाल गर्ग को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े हाई-प्रोफाइल केस की जांच सौंपी गई थी। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने इस मामले में बेहद सख्त और तथ्यपरक जांच की, जिसके चलते राम रहीम को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
रामगोपाल गर्ग बन सकते हैं रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर



