पखांजुर। जागृति मंच पखांजुर ने शहीद खुदीरम बोस का 136वां जयंती उपल्क्ष में माल्यार्पण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम किया। सुबह 6बजे नेताजी चौक में खुदीरम बोस का छायाचित्रों पर मंच उपाध्यक्ष ऋषिकेश मजुमदार, सचिव निबास,सक्रिय सदस्य बापन पाल,अशोक मृधा,रंजित सरकार, अधिकारी,बुद्धिजीवी, आम साधारण लोगोंने गर्व सम्मान के सिथ बड़ – चरकर हिस्सा लिया और फुल माला अर्पित किया।शाम चार बजे पखांजुर शुभपल्ली दुर्गा मंच में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में गीत रेखा मल्लीक,ज्योत्सना राय,बिपल्ब अधिकारी, ज्योत्सना,एकबार बिदाय दे मां घुरे आसि,भारत आमार भारतवर्ष, निरबल से लडा़ई वलवान की, हओधर मेते धीर हओकर मेते वीर, मानुष मानुषेर जन्ने आदि गीत की प्रस्तुति दी। बनानी आईच ने कविता आबृत्ति की। रमा दास,शिंकु समाजपती, अशोक मृधा,निबास, आदि ने उनके बातों में कहां है की समाज निर्माण में और आजादी हासिल करने में अंग्रेज़ी हुकूमत पर प्रथम बम फेक कर भारतीयों को गुलाम बनाकर रखने की फिरिंगीयों की राज का नींव हिला दिया।त्कालीन समय भी गुलामी की राजनीति थी, अंग्रेजों के विरोध के नाम पर अंग्रेजों की षड्यंत्र के आगे नतमस्तक गुलामी की नितियों को अपना कर समझौतावादी अंग्रेजों के साथ तालमेल बिठा करचल रहे थे।कायरता, भीरुता और स्वार्थसिद्धि के आत्मकेन्द्रिकता थे। लेकिन वे खुदीराम को प्रभावित नहीं कर सके।खुदीरम बोस को ऐसी राजनीति के प्रति विकर्षण ने उन्हें जीवन के प्रति निराश नहीं किया यह उन्हें इन्सानियत, मानवता के धर्म से विचलित नहीं कर सका। इसने उन्हें राजनीति से विमुख नहीं किया। और यही कारण है कि खुदीराम, एक होते हुए भी, लाखों जीवन के प्रतीक थे। उनके बलिदान ने बाघाजतिन, असफाकउल्ला, बिस्मिल, मास्टरदा, भगत सिंह, सुभाष चंद्र जैसे अनगिनत मृत्युंजय क्रांतिकारियों को जन्म दिया।उन लाखों की कुर्बानी से दो सौ की अंग्रेजों की गुलामी से देश आजाद हुआ।रेखा मल्लीक,ज्योत्सना राय,रमा दास, छबि बाला, सोमा हिरा राधा चक्रवर्ती, झुमा चक्रवर्ती, सरस्वती शिल,अनिमा मण्डल,निलिमा हालदार,विसखा मण्डल, बिना सरकार, सला सरदार, शिंकु समाजपती सहदेव बेसरा, रेख सूत्रधार, सत्यजीत दास आदि ने श्रद्दांजलि अर्पित की और कार्यक्रम में उपस्थित रहे।



