रायगढ़। धरमजयगढ़ क्षेत्र के दर्रापारा गांव में सडक़ व पुल नहीं होने के कारण एक महिला को लेबर पेन होने पर ग्रामीणों ने खाट पर नदी पार कर अस्पताल पहुंचाया है, जहां डिलिवरी के बाद जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे के बीच धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के दर्रापारा गांव से एक तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत बयां करती है। ग्राम पंचायत पेलमा के आश्रित मोहल्ला दर्रापारा में शुक्रवार की रात प्रसव पीड़ा से कराहती एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए न सडक़ काम आई, न कोई वाहन पहुंच सका और न ही नदी पर सुरक्षित पुल मौजूद था। ऐसे मुश्किल वक्त में ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी और खाट को ही एंबुलेंस बना दिया। महिला को खाट पर सुरक्षित लिटाया गया और कई ग्रामीणों ने उसे अपने कंधों पर उठाकर रात के अंधेरे में नदी पार कराई। पानी के बहाव के बीच बेहद सावधानी से कदम बढ़ाते हुए ग्रामीण महिला को दूसरी ओर लेकर पहुंचे। इसके बाद उसे पेलमा की मुख्य बस्ती स्थित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया गया। कई चुनौतियों को पार कर महिला को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उसका सुरक्षित प्रसव हुआ। राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों स्वस्थ एवं सुरक्षित हैं। यह घटना ग्रामीणों की तत्परता और सामूहिक प्रयास की मिसाल है, लेकिन दुर्गम बस्तियों में सडक़, पुल और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
दर्रापारा में हमारा सब-स्वास्थ्य केंद्र है, पुल व सडक़ के अभाव होने के कारण आवश्यक दवाईयां बारिश के पहले ही भंडारित करा दी जाती है, शुक्रवार को प्रसुता को लाकर धरमजयगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सुरक्षित डिलिवरी कराया गया है। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ है, सोमवार को डिस्चार्ज किया जाएगा।
डॉ. गजानंद राठिया, बीएमओ
क्या कहते हैं ग्रामीण
इस संबंध में दर्रापारा के ग्रामीणों का कहना है कि धरमजयगढ़ अस्पताल से 50 मीटर की दूरी पर एक नदी है, उसके दूसरी छोर में करीब डेढ किलोमीटर अंदर में ग्राम पंचायत पेलमा का आश्रित ग्राम दर्रापारा है, जहां आज भी न तो नदी पर पुल है और न ही सडक़, इस कारण बरसात के दिनों में इस गांव के लोग शहर से पूरी तरह से कट जाते है। वहीं बारिश बंद होने के बाद नदी सुखते ही इनका आना-जाना शुरू होता है, ऐसे में यहां पुल व सडक़ बन जाता तो काफी राहत मिलती है। यही कारण है कि बरसात के दिनों में किसी की तबीयत बिगड़ती है तो गांव के लोग खाट पर मरीज को लोड कर अस्पताल तक पहुंचाते हैं।



