सारंगढ़। छग की समृद्ध लोक कला, लोक संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षण, प्रोत्साहन देने की दिशा में संस्कृति विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर प्रदेश भर के लोक कलाकारों, संगीत साधकों ने संस्कृति विभाग संचालक डॉ. संजय कन्नोजे का आभार व्यक्त किया। पुरातत्व, संग्रहालय घड़ी चौक रायपुर स्थित सभागार में आयोजित विशेष मुलाकात में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कलाकारों ने डॉ. कन्नोजे के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय बाद कलाकारों की समस्याओं और अपेक्षाओं को गंभीरता से सुनने वाला नेतृत्व संस्कृति विभाग में देखने को मिला है। इस अवसर पर छग के प्रसिद्ध पंथी कलाकार, लोक गायक, नाचा-गम्मत कलाकार, सांस्कृतिक मंचों से जुड़े कलाकारलोक संगीत साधकों ने एक स्वर में कहा कि संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नोजे ने अपने अल्प कार्य काल में कलाकारों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कई सकारात्मक पहल की हैं। कलाकारों ने उनके कार्यों को लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ.आर. एस. बारले सहित प्रदेश के ख्याति प्राप्त पंथी कलाकार, लोक गायकों और सांस्कृतिक मंचों से जुड़े कलाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छग की पहचान बनाने वाले पंथी कलाकार, लोक गायक और सांस्कृतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल रहे। कलाकारों ने संस्कृति विभाग के समक्ष अपनी अपेक्षाएं व सुझाव भी रखे।
उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों को योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ मिले, वरिष्ठ कलाकारों का सम्मान बढ़े व नई पीढ़ी को छग की पारंपरिक कला एवं संस्कृति से जोडऩे के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं। वहीं संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नोजे ने कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छग की पहचान उसकी लोक संस्कृति, लोक संगीत और यहां के कलाकारों की प्रतिभा से है। उन्होंने कलाकारों को राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी तथा शासन की योजना का लाभ अधिक से अधिक कलाकारों तक पहुंचाने की बात कही। बैठक में उपस्थित कलाकार ने कहा कि संस्कृति विभाग, कलाकारों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होना लोकसंस्कृति के विकास हेतू सकारात्मक संकेत है कलाकारों का मानना है कि डॉ. संजय कन्नोजे के नेतृत्व में विभाग ने कलाकारों की समस्याओं को समझने, समाधान की दिशा में तेजी से पहल की है। छग की लोककला परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों का यह सम्मान और संवाद कार्यक्रम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि- प्रदेश में लोक संस्कृति को नई ऊर्जा देने के प्रयास तेज हुए हैं। कलाकारों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में संस्कृति विभाग के माध्यम से लोक कलाकारों के हित में और भी प्रभावी योजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी।
इस समारोह में प्रमुख रुप से विष्णु कांत दीक्षित लोक कलाकार,रतन लाल निषाद, परमेश्वर नाथ, सुरेन्द्र कुमार सोरी कलाकार, लक्ष्मी कांत पण्ड्या शिक्षक, अध्यक्ष छग पंथी पार्टी, मुंगेली, यमुना भारती गीतकार, म्यूजिक डायरेक्टर, रंजीत चौधरी प्रदेश अध्यक्ष, छग गम्मत मंच, घनश्याम साहू लोक संध्या सांस्कृतिक लोक मंच, रायपुर, टीकम पटेल श्रद्धा के फूल लोक मंच, रायपुर, गंगा प्रसाद साहू लोक बयार, आरंग खिलेश्वरी संजय साहू गुढिय़ारी, रायपुर, संतोष देश मुख लोक सिरजन, पवन एल्बम, सनी गिरी एल्बम, मोहन दास चतुर्वेदी पंथी कलाकार, राजेन्द्र टंडन पंथी, अशोक कुमार डहरिया लोक कलाकार, विष्णु कोठारी मीत कलाकार, दिलीप नवरंग लोक मंच नवरंग, नरोत्तम प्रसाद कुर्रे पंथी, पदुमलाल मुंगेली, परसराम पंथी, लोक नृत्य, किरण भारती, ताराभारती पचेड़ा, चंदन बांधे रायपुर, हृदय प्रकाश अनंत कलाकार, पद्मश्री डॉ. आरएस. बारले ख्याति प्राप्त पंथी कलाकार, भिलाई, दिनेश रा. ख्याति पंथी कलाकार आरंग, गोकरण बघेल अंतर्राष्ट्रीय पंथी कलाकार, दुर्ग, इतवारी राम मधुकरअंतर्राष्ट्रीय पंथी दुर्ग, रोहित कुमार कोसरीया राज्य अलंकरण सम्मान प्राप्त पंथी, महासमुंद, धीरेन्द्र लोकगायक, बिल्हा विजय मनहर लोक गायक, मुंगेली, सनम टंडन लोक गायक, बिलासपुर, पुराणिक साहू निर्देशक, संग लहर गंगा एवं संस्थापक लोक कला धनेली, राजेन्द्र साहू लोक मंच, कुम्हारी, दुर्ग, पप्पू लेवेन्द्र प्रकाश चंद्राकर बालोद, चंदूलाल भास्कर डोमनपुर, मुंगेली मालिक राम लहरे नवागढ़, बेमेतरा, सतनाम भजन गायक, बन्ती गिरी एल्बम कलाकार, वानरोत्तम धृतलहरे पंथीगायक, मड़वा, मुंगेली के अलावा लगभग डेढ़ सौ छग की लोक पंथीकला परंपरा से जुड़े प्रमुख कलाकार उपस्थित थे।
लोक कलाकारों ने की डॉ संजय कनौजे की प्रशंसा



