रायगढ़। तमनार क्षेत्र के किसानों को कम लागत और कम समय में धान के अधिक उत्पादन का उपाय जिंदल पॉवर के जिंदल फाउंडेषन द्वारा बताया जा रहा है। गुरूवार को तमनार में मषीन से श्रीविधि से रोपाई का प्रदर्षन किसान के खेत में किया गया।
क्षेत्र में खेती किसानी का काम इन दिनों प्रगति पर है। जिंदल पॉवर प्लांट क्षेत्र के किसानों की आय को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस दिषा में खेती की नई- नई तकनिकों की जानकारी भी किसानों को दी जा रही है साथ ही आधुनिक खेती के लिए उपाय भी बताए जा रहे हैं। जिंदल फाउंडेषन द्वारा मई माह में क्ष़ेत्र के किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती करने का प्रषिक्षण दिया गया था। उस समय किसानों को मषीन से धान के बीज को रोपा के लिए तैयारी करने की विधि बताई गई थी। जिंदल फाउंडेषन द्वारा करीब पांच एकड़ से अधिक जमीन पर रोपा लगाने के लिए नर्सरी लगाई गई थी। नर्सरी तैयार हो जाने के बाद गुरूवार 6 अगस्त को मषीन से रोपाई का प्रदर्षन किया गया और खेत में रोपा लगाया गया।
मषीन से पौधा से पौधा और कतार से कतार की दूरी तय
श्रीविधि से धान की रोपाई का प्रदर्षन किया गया। धान की नर्सरी को प्लेट से निकाल कर सीधा मषीन के प्लेट में पौधों को डाला गया इसके बाद मषीन द्वारा ही खेत में रोपाई की गई। इस विधि से धान के पौधों से पौधा की दूरी और कतार से कतार की दूरी पूरी तरह से बराबर है। इससे पौधों को ग्रोथ करने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी, जिससे धान के पौधों के कन्से अधिक आएंगे इससे उत्पादन भी बढ़ेगा। साथ ही मषीन से रोपाई होने के कारण मजदूर भी कम लगेंगे अर्थात लागत भी कम आएगी। एक मषीन एक घंटा में करीब तीन एकड़ खेत में रोपाई कर सकती है। इस अवसर पर कृशि प्रभारी सीएसआर सुरेष डनसेना सहित क्षेत्र के किसान व विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों ने बताया फायदेमं
धान की नर्सरी आदर्ष ग्राम्य भारती स्कूल परिसर में लगाई गई थी। इससे यहां कि एग्रीकल्चर विशय लेकर पढऩे वाले विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल करने का भी मौका मिला। स्कूल की एग्रीकल्चर की छात्रा, अल्पना, भाग्य लक्ष्मी और सुमन ने बताया कि जिंदल फाउंडेषन द्वारा धान की नर्सरी तैयार करने और श्रीविधि से धान की रोपाई करने का तरीका बताया गया। उसे प्रत्यक्ष देखकर उन्हें बहुत जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि यह जानकारी उनकी पढ़ाई के लिए फायदेमंद होगी। स्कूल के संचालक लक्ष्मीनारायण चैधरी ने बताया कि एग्रीकल्चर विभाग के विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी रहा। व्याख्याता मनोज सोनवानी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया व विधि को एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों ने जाना यह उनके लिए प्रैक्टिकल था, जिसका फायदा उन्हें मिलेगा।
फ्लाई ऐष और वर्मी कंपोस्ट का बेहतरीन उपयोग
इस योजना की को ऑर्डिनेटर तमा यादव ने बताया कि नर्सरी लगाने के लिए फ्लाई ऐष का उपयोग किया गया था, जिसका परिणाम बेहतरीन रहा है। षत प्रतिषत पौधे उगे साथ ही पौधों को ग्रोथ भी पर्याप्त मिला। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐष 15 किलो, 5 किलो वर्मी कंपोस्ट 7 किलो भुरभूरी मिट्टी का लेयर बनाया गया था। जिसमें उपचारित बीज को डाला गया। इसका परिणाम बेहतरीन रहा है।



