नारायणपुर। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर बादलखोल अभ्यारण्य के नारायणपुर रेंज में बुधवार को बाघ संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को लेकर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दिनभर चले आयोजनों में विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली, संगोष्ठी, चित्रकला, स्लोगन एवं निबंध लेखन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बाघों के संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर गेम रेंजर नारायणपुर की उपस्थिति में जागरूकता रैली से हुई। वन विभाग के अधिकारियों, विद्यालय स्टाफ और छात्र-छात्राओं ने नगर में रैली निकालकर लोगों को बाघों और जंगलों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। रैली के दौरान वातावरण देशभक्ति और पर्यावरण संरक्षण के नारों से गूंज उठा। छात्र-छात्राएं हाथों में जागरूकता तख्तियां लिए हुए चल रहे थे और पूरे उत्साह के साथ नारे लगा रहे थे बाघ बचेंगे, जंगल बचेंगे, जीवन बचेगा। जंगल की हर धडक़न, हमारे अस्तित्व का आधार। रैली के माध्यम से आम नागरिकों से अपील की गई कि वे वन्यजीवों की सुरक्षा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए आगे आएं। रैली के बाद शासकीय प्राथमिक शाला दाराखरीका में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विद्यार्थियों और ग्रामीणों को बाघों की घटती संख्या, उनके संरक्षण की आवश्यकता, वन्यजीवों के महत्व तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बाघों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो जैव विविधता भी सुरक्षित रहेगी और मानव जीवन भी संतुलित रहेगा।
इसी क्रम में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नारायणपुर एवं कन्या शाला नारायणपुर में बाघ दिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा श्रीनिवास तनेटि के निर्देश पर अधीक्षक आशुतोष भगत के मार्गदर्शन एवं गेम रेंजर सिद्धार्थ भारती के नेतृत्व में आयोजित इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने चित्रकला, स्लोगन लेखन और निबंध लेखन के माध्यम से बाघ संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों ने रंगों और शब्दों के जरिए यह संदेश दिया कि प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बाघ संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन के महत्व से अवगत कराया गया। साथ ही गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा और गुरुजनों के सम्मान का संदेश भी दिया गया। विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, वन्यजीवों की रक्षा करने तथा जल एवं प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया प्रत्येक छोटा कदम भविष्य में बड़े सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकता है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को यह भी बताया कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का प्रतीक है। यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे तो जंगल सुरक्षित रहेंगे और जंगल सुरक्षित रहेंगे तो जल, जलवायु तथा मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। इसके साथ ही वन्यजीव एवं मनुष्य के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के उपायों पर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
प्रतियोगिताओं के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। विजेताओं को सम्मानित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना विकसित करती हैं। कार्यक्रम के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि विश्व बाघ दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में बाघों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयासों के तहत की गई थी। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, अभ्यारण्य का समस्त स्टाफ, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तथा ग्रामीणजन उपस्थित रहे। पूरे आयोजन का उद्देश्य समाज में यह संदेश पहुंचाना था कि बाघों और जंगलों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर रैली, संगोष्ठी और प्रतियोगिताओं के जरिए संरक्षण का संदेश
बाघ बचेंगे तो जंगल बचेंगे, जंगल बचेंगे तो जीवन बचेगा



