रायपुर। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने नेताओं और संभावित टिकट दावेदारों के लिए नए संगठनात्मक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत अब किसी भी धरना-प्रदर्शन, आंदोलन, जनसंपर्क अभियान या राजनीतिक कार्यक्रम से पहले संबंधित जिला कांग्रेस कमेटी को पूर्व सूचना देना तथा स्थानीय संगठन से समन्वय करना अनिवार्य होगा। पार्टी का कहना है कि यह अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि संगठनात्मक तालमेल मजबूत करने की पहल है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में कई नेताओं ने स्थानीय संगठन को विश्वास में लिए बिना अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। इसकी शिकायतें रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर समेत कई जिलों से लगातार मिल रही थीं। संगठन का मानना है कि ऐसी समानांतर गतिविधियों से कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनती है और गुटबाजी को बढ़ावा मिलता है। नए निर्देशों को लेकर संभावित टिकट दावेदारों में चिंता भी है। उनका कहना है कि स्थानीय मुद्दों पर कई बार तत्काल विरोध-प्रदर्शन करना पड़ता है। ऐसे में पहले सूचना देने और समन्वय की प्रक्रिया पूरी करने से राजनीतिक प्रतिक्रिया देने में देरी हो सकती है। कुछ नेताओं को यह भी आशंका है कि संगठनात्मक निर्देशों की अनदेखी का असर भविष्य में टिकट वितरण पर पड़ सकता है। पार्टी के भीतर लंबे समय से जिला कांग्रेस कमेटियों और विधायकों के बीच समन्वय की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में, जहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं, वहां संभावित दावेदारों और विधायकों के बीच कार्यक्रमों को लेकर खींचतान की स्थिति अधिक देखने को मिली है। कांग्रेस संगठन का कहना है कि नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य किसी नेता की सक्रियता पर रोक लगाना नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को एकजुट और अनुशासित रखना है। अब देखना होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना पालन होता है और क्या इससे संगठन के भीतर गुटबाजी कम हो पाती है।



