रायगढ़। अभियान संवेदना के तहत पुलिस चौकी रैरूमाखुर्द एवं धरमजयगढ़ पुलिस ने 15 वर्षीय गुम बालिका को सकुशल दस्तयाब कर प्रकरण में संलिप्त विधि से संघर्षरत बालक को अपहरण और पॉक्सो एक्ट मे निरुद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की है। वहीं महिला थाना ने विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी महेन्द्र पासवान (31 वर्ष), पिता बलिराम पासवान, निवासी जूटमिल सामने गली, थाना जूटमिल, जिला रायगढ़ को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है।
मिली जानकारी के अनुसार 14 जून को बालिका की मां ने पुलिस चौकी रैरूमाखुर्द में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 15 वर्षीय नाबालिग पुत्री 10 जून से लापता है तथा किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका है। शिकायत पर चौकी रैरूमाखुर्द में धारा 137(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
विवेचना के दौरान लगातार पतासाजी के बाद 18 जून को गुम बालिका को उसकी मां द्वारा पुलिस चौकी में प्रस्तुत किया गया, जहां गवाहों की उपस्थिति में उसकी सकुशल बरामदगी की कार्रवाई की गई। चौकी प्रभारी रैरूमाखुर्द उप निरीक्षक विजय एक्का द्वारा महिला अधिकारी से बालिका का कथन दर्ज किया गया, जिसमें उसने बताया कि विधि से संघर्षरत बालक उसे शादी करने का झांसा देकर जबरन अपने साथ उसके गांव ले गया था जहां उसकी उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए । प्रकरण में बीएनएस की धारा 64(2)(उ), 65(1) एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 4, 6 जोड़ी गई।
विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने अपचारी बालक की तलाश कर उसे उसके निवास से अभिरक्षा में लिया। पूछताछ में उसके द्वारा अपराध स्वीकार करने पर नियमानुसार उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर 01 जुलाई को विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए अपचारी बालक को निरुद्ध कर सक्षम न्यायालयध्बाल न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, भेजा गया जेल
वहीं दूसरी घटना में 2 जुलाई को पीडि़ता (31 साल) ने महिला थाना रायगढ़ में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि वर्ष 2018 में उसकी पहचान महेन्द्र पासवान से हुई। आरोपी ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए पीडि़ता से विवाह करने का आश्वासन दिया। पीडि़ता द्वारा अपने परिवार की जानकारी देने के बावजूद आरोपी ने उसे विश्वास में लिया और अपने साथ किराये के मकान में रखा, जहां विवाह का विश्वास दिलाकर लगातार शारीरिक संबंध स्थापित करता रहा।
पीडि़ता ने शिकायत में बताया कि उसे जानकारी मिली कि आरोपी पहले से विवाहित है तथा उसके तीन बच्चे हैं। इस संबंध में पूछने पर आरोपी ने विवाद करते हुए 30 जून को उसे अपने साथ रखने से इंकार कर घर से निकाल दिया।
महिला के आवेदन पर धारा 69 बीएनएस पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान पीडि़ता का कथन दर्ज कर उसकी सहमति से चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, जहां चिकित्सक द्वारा आवश्यक जैविक साक्ष्य सुरक्षित किए गए। पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश कर उसे उसके निवास से हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने पर उसका भी चिकित्सीय परीक्षण कराया गया तथा वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।



