सारंगढ। छग शासन के जिला प्रशासन, सरगुजा द्वारा आयोजित प्रदेश के प्रतिष्ठित रामगढ़ महोत्सव–2026 में 15 वर्षीय युवा कथक साधिका सुश्री शार्वी केशरवानी ने अपनी उत्कृष्ट, भावपूर्ण एवं तकनीकी दृष्टि से सशक्त कथक प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। आस्था, संस्कृति, नाट्य परंपरा एवं पर्यटन को समर्पित यह महोत्सव छत्तीसगढ़ का एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन है, जहाँ देशभर के चयनित कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। ऐसे गौरवशाली मंच पर प्रस्तुति देना किसी भी कलाकार के लिए विशेष उपलब्धि माना जाता है।
शार्वी ने अपनी प्रस्तुति का शुभारंभ माँ सरस्वती वंदना से किया। इसके पश्चात कथक के पारंपरिक तोड़े, टुकड़े, परन एवं तत्कार की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। आगे महाकाली की स्तुति की ओजस्वी एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया तथा अंत में मनोहारी तराना के साथ अपनी प्रस्तुति का समापन किया। उनकी नृत्य प्रस्तुति को उपस्थित कला-रसिकों एवं विशिष्ट अतिथियों ने भरपूर सराहना दी। उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए शार्वी को छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के करकमलों से प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर मंच पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, विधायकगण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
15 वर्षीय कथक साधिका सुश्री शार्वी केशरवानी, मोना ग्रुप ऑफ एजुकेशन के संस्थापक द्वय डॉ. रितेश केशरवानी एवं प्रख्यात कथक गुरू डॉ. तोषी गुप्ता की सुपुत्री हैं। शार्वी के व्यक्तित्व और कला-साधना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विगत 10 वर्षों से उनकी माता डॉ. तोषी गुप्ता ही उनकी प्रथम गुरु एवं कथक मार्गदर्शिका भी हैं। माता के स्नेह, संस्कार और गुरु के अनुशासित प्रशिक्षण का अद्भुत समन्वय शार्वी की प्रत्येक प्रस्तुति में सहज रूप से परिलक्षित होता है। साथ ही वे वरिष्ठ कथक गुरू डॉ. राजश्री नामदेव के सान्निध्य में भी कथक की गहन एवं निरंतर साधना कर रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी हैं। शार्वी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई एवं थाईलैंड तथा राष्ट्रीय स्तर पर विश्व प्रसिद्ध 38वें चक्रधर समारोह (2023), 39वें चक्रधर समारोह (2024), राज्योत्सव (2025) एवं सिरपुर महोत्सव (2026) सहित अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। अब तक वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 60 से अधिक कथक प्रस्तुतियाँ देकर अपनी सशक्त मंचीय उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं।
अपनी उत्कृष्ट कला साधना के लिए शार्वी को राष्ट्रीय कला वैभव सम्मान, बाल नृत्य कला वैभव सम्मान, नृत्य ओजस्वी, प्रणवम् शिखामणि, कौशल कला सम्मान, नृत्य साधिका, कला अलंकरण, नृत्य मंजरी, कला अभ्युदिता, उदितमान सम्मान एवं कला साधिका सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त थाईलैंड एवं दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्वर्ण पदक अर्जित कर भारत एवं छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। हाल ही में देहरादून में आयोजित तारांगण ऑल इंडिया नेशनल डांस, म्यूजिक एवं फाइन आर्ट्स प्रतियोगिता एवं महोत्सव 2026 में उन्हें नृत्य रंजनी अवार्ड व मंगलम महोत्सव 2026 में स्वर्ण नृत्य मंगलम अवार्ड से सम्मानित किया गया।
शार्वी की उपलब्धियों के साथ उनके गुरुओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान प्राप्त हुए हैं। डॉ. तोषी गुप्ता को कथक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रशिक्षण, भारतीय शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण एवं नई पीढ़ी के कलाकारों के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए मंगलम महोत्सव 2026 में मंगलम गुरु गौरव सम्मान तथा देहरादून के तारांगण महोत्सव में तारांगण प्रतिभा सम्मान से अलंकृत किया गया। शार्वी केशरवानी की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार एवं गुरुओं के लिए गौरव का विषय है, बल्कि सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण है। उनकी निरंतर साधना, अनुशासन, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण तथा गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों का अनुपम संगम उन्हें देश की उदीयमान कथक साधिकाओं की अग्रिम पंक्ति में स्थापित कर रहा है।
रामगढ़ महोत्सव में सारंगढ़ की कत्थक साधिका शार्वी केशरवानी ने बिखेरी भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा



