सारंगढ़-बरमकेला। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) की बरमकेला शाखा में 18.13 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में बैंक प्रबंधन ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष ऑडिट और आंतरिक जांच में गड़बडिय़ों की पुष्टि होने के बाद शाखा प्रबंधक, लेखाधिकारी और लिपिक समेत कुल 8 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्लू) से विस्तृत जांच कराने की तैयारी भी की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2021 से नवंबर 2024 के बीच बरमकेला शाखा में समितियों और डीएमआर खातों से जुड़े लेन-देन में नियमों के विपरीत वित्तीय गतिविधियां सामने आईं। मामले की जानकारी मिलने के बाद बैंक मुख्यालय ने विशेष ऑडिट और विभागीय जांच कराई। जांच रिपोर्ट में करीब 18.13 करोड़ रुपये के अनाधिकृत हस्तांतरण और वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
शाखा प्रबंधक सहित 8 कर्मचारियों पर कार्रवाई
बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदार नाथ गुप्ता ने बताया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक डीआर वाधमारे, लेखाधिकारी मीनाक्षी मांझी और लिपिक आशीष कुमार पटेल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत लिकेश कुमार बैरागी, रमाकांत श्रीवास्तव, अरुण चंद्राकर, खीरदास महंत और बालकृष्ण कर्ष की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं।बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ मामले में शामिल पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों से नियमानुसार राशि की वसूली की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
तीन साल से अधिक के लेन-देन की हुई समीक्षा
बैंक की जांच में अप्रैल 2021 से नवंबर 2024 तक की अवधि के वित्तीय रिकॉर्ड और लेन-देन की विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष ऑडिट रिपोर्ट में समितियों और डीएमआर खातों से जुड़े कई लेन-देन पर सवाल उठाए गए, जिसके आधार पर जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका तय की गई। बैंक मुख्यालय का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर जांच प्रक्रिया पूरी की गई है तथा सामने आए तथ्यों के अनुसार कार्रवाई की गई है।
पहले ही दर्ज हो चुकी है एफआईआर
इस प्रकरण में इससे पहले आठ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। ऐसे में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। बैंक प्रबंधन का मानना है कि जांच आगे बढऩे के साथ मामले के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल होगी। करीब 18 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता के इस मामले में अब आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा से भी जांच कराने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ईओडब्लू की जांच शुरू होने पर वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेजों और संबंधित लेन-देन की विस्तृत समीक्षा की जा सकती है।
तकनीकी सुधारों पर जोर
मामले के सामने आने के बाद बैंक ने अपनी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई तकनीकी कदम उठाने का दावा किया है। केदार नाथ गुप्ता के अनुसार किसानों के नाम पर फर्जी ऋण वितरण रोकने के लिए नया सॉफ्टवेयर लागू किया गया है। इसके साथ ही ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाया गया है। बैंक का कहना है कि डिजिटल निगरानी और तकनीकी सुधारों के जरिए सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
मुनाफे में बढ़ोतरी का दावा
बैंक प्रबंधन के अनुसार वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का असर बैंक के प्रदर्शन पर भी दिखाई दिया है। वर्ष 2024-25 में बैंक ने 38.99 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढक़र 40.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बरमकेला शाखा का यह मामला सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय कार्रवाई के बाद अब निगाहें ईओडब्लू जांच पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा, राशि की वसूली और जिम्मेदारियों के निर्धारण से जुड़े कदम इस पूरे प्रकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



