रायगढ़। ईश्वर की आराधना में भी मतभेद रहे। विष्णु-भक्त प्रजापति दक्ष ने शिव का विरोध किया, पुत्री सती का विवाह रोका। सती ने आत्मदाह कर लिया, पर महादेव ने अपमान का गरल हंसकर पी लिया। तभी वे ‘देवों के देव महादेव’ बने। राजनीति का चक्रव्यूह भी कुछ ऐसा ही है। जो षड्यंत्र का शिकार होकर भी अपमान सहकर लक्ष्य से न डिगे, वही महादेव जैसा ‘भोले दर्शन’ वाला नेता बनता है। रायगढ़ की राजनीति में ऐसा ही एक नाम है : उमेश अग्रवाल।
छात्र जीवन से संघर्ष का बीज
रायगढ़ के प्रतिष्ठित व्यवसायी परिवार में जन्मे उमेश अग्रवाल छात्र जीवन से ही चुनौतियों से जूझने वाले युवा रहे। विधि महाविद्यालय में निर्दलीय चुनाव लडक़र अध्यक्ष बने और फिर महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए भूमि आबंटन की मुहिम का नेतृत्व किया। आज का बाल कृष्ण पुरी विधि महाविद्यालय भवन उसी संघर्ष का परिणाम है। उस दौर का उनका स्लोगन था- संघर्षों के साये में असली आजादी पलती है, इतिहास उधर मुड़ जाता है जिधर जवानी चलती है। यही जज्बा उन्हें भाजपा का सदस्य बना गया।
गुटबाजी की सौतन को दिखाया बाहर का रास्ता
रायगढ़ भाजपा ढाई दशक से गुटीय राजनीति की शिकार रही। कार्यकर्ता सडक़ों पर गुटबाजी महसूस करते थे। जिला अध्यक्ष बनते ही उमेश अग्रवाल ने जिला भाजपा कार्यालय से गुटबाजी की ‘सौतन’ को बाहर का रास्ता दिखाया। नतीजा संगठन में एकजुटता आई और सूबे के ताकतवर मंत्री ओपी चौधरी के लिए रायगढ़ विधानसभा में ऐतिहासिक जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ। रायगढ़ वासी इसके लिए उमेश के सदैव ऋ णी रहेंगे।
55वें जन्मदिन पर उमड़ा जनसैलाब
आज उनके निवास स्थान जगदम्बा विला पर सुबह से ही बधाई देने वालों की कतार लगी रही। इस कतार ने जगदम्बा विला को आज पॉलिटिकल पावर सेंटर बना दिया। बधाई देने वालों में जिला भाजपा के पदाधिकारी, महापौर, सभापति सहित पार्षद शामिल रहे। प्रदेश स्तर पर संगठन के नेताओं ने उमेश अग्रवाल को दूरभाष पर बधाई दी। जिला प्रशासन के आला अफसरों ने भी पूर्व जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल को बधाई देते हुए उनके स्वास्थ्य समृद्ध जीवन की कामना की। महिला मोर्चा, भाजयुमो अध्यक्ष सहित जिले भर के नेताओं ने उमेश अग्रवाल को उनके 55वें जन्मदिन पर बधाई दी। उमेश अग्रवाल ने सभी शुभचिंतकों के प्रति आभार जताते हुए कहा, सभी का प्यार स्नेह ही मेरे कार्य की ऊर्जा है। जन्मदिन के दिन मिले अपार स्नेह से मैं अभिभूत हूं। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा में छोटे से कार्यकर्ता से मैंने राजनीति की शुरुआत की, पार्टी ने मुझे जिलाध्यक्ष के पद का दायित्व दिया।
बिना परिक्रमा अपनी शर्तों पर मंजिल
भाजयुमो से शुरुआत, फिर पार्टी प्रवक्ता, कोषाध्यक्ष, महामंत्री और उसके बाद जिलाध्यक्ष… फिर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य। ढाई दशक की राजनीति में उमेश अग्रवाल का सबसे सुखद पहलू यही रहा उन्होंने कभी किसी की राह नहीं रोकी, न किसी की परिक्रमा की। अपनी मंजिल अपनी शर्तों पर तय की। उनका कार्यकाल बेदाग रहा। अमूमन लोग राजनीति से स्वार्थ साधने आते हैं, पर उमेश ने सकारात्मक राजनीति के पदचिन्ह बनाए जो जमीनी कार्यकर्ता के लिए पथ-प्रदर्शक हैं।
नशा मुक्ति और राजनीति में शिव दर्शन
उमेश का नशा-मुक्ति आंदोलन इस अंचल में मील का पत्थर बना। आज की पीढ़ी पद, रसूख, सत्ता के नशे की शौकीन मानी जाती है, पर नशा-मुक्ति अभियान चलाने वाले उमेश अग्रवाल खुद सभी प्रकार के नशे से दूर रहे। यही उनकी ‘पॉलिटिकल ब्यूटी’ है। रामायण में राम, महाभारत में कृष्ण सबसे ज्यादा चर्चित रहे। पर महादेव बिना प्रचार-प्रसार के लोक कल्याण करते रहे। राम की माता कौशल्या को रावण ने समुद्र में बहाया, महादेव ने बंद आंखों से देखकर प्रकृति से उनकी रक्षा का अनुरोध किया। महादेव सभी के कोप का भाजन भी बने, पर वंचितों-अपमानितों को सहारा देना नहीं छोड़ा। ठीक वैसे ही उमेश अग्रवाल की राजनीति ‘शिव दर्शन’ से जुड़ी है दिखावे से दूर, नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित। राजनीति में उनकी सामर्थ्य का आकलन कठिन है, क्योंकि वे शोर नहीं, समाधान पैदा करते हैं। उद्यमी, नेता, प्रेरणा एक सफल उद्यमी, दूरदर्शी नेता और प्रेरणादायक व्यक्तित्व : उमेश अग्रवाल ने अपने कार्यों से कम, अपने व्यवहार और विचारों से ज्यादा लोगों के दिलों में जगह बनाई है। एलएलबी की शिक्षा के साथ पैतृक व्यवसाय से अलग उद्योग के जोखिम भरे क्षेत्र में कदम रखा यह साहस ही उनकी पहचान है।



