रायगढ़। कलेक्टर के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में जिला स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में बच्चों के बढ़ते मधुमेह विशेषकर डायबिटीज (बाल मधुमेह की समय पर पहचान) प्रभावी उपचार और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित कुल 170 प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यशाला में यूनिसेफ के विशेषज्ञों ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को डायबिटीज के लक्षणों की शीघ्र पहचान, समयानुकूल उपचार तथा समग्र प्रबंधन की तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान डायबिटीज की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन, काउंसलिंग और रोगी सहायता समूहों की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता रणनीतियां तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सहयोग के महत्व जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों एवं अनुभव साझा कर विषय की गहन समझ विकसित की, जिससे भविष्य में रोगी देखभाल को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने इस पहल को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक और सराहनीय कदम बताया। प्रशिक्षण का संचालन यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह एवं अक्षय तिवारी (मास्टर ट्रेनर) के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. कैनन डेनियल जिला नोडल अधिकारी एनसीडी, डॉ. सुमित मंडल सहायक नोडल सलाहकार, डॉ. जावेद जिला नोडल सिकल सेल, सुश्री रंजना पैकरा तथा श्रीमती सीमा बरेठ (डीपीएचएन) का विशेष सहयोग रहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन कम होना, कमजोरी, थकान, धुंधला दिखाई देना तथा बच्चों में चिड़चिड़ापन या व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, मीठे पेय पदार्थों से परहेज और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है।
बच्चों में डायबिटीज की समय पर पहचान और उपचार को लेकर कार्यशाला आयोजित
स्वास्थ्यकर्मियों को दी गई तकनीकी जानकारी



