रायगढ़। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता तथा सांसद, राज्यसभा सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों की विशेष उपस्थिति में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2025-26 के लिए खनिज प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा करते हुए 104 करोड़ 7 लाख रुपए से अधिक की लागत के 392 विकास कार्यों का अनुमोदन किया गया। बैठक में पिछले 30 अक्टूबर को आयोजित शासी परिषद की बैठक में स्वीकृत 150 करोड़ रुपए के कार्यों की विभागवार समीक्षा भी की गई तथा कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह, धरमजयगढ़ विधायक लालजीत सिंह राठिया एवं लैलूंगा विधायक श्रीमती विद्यावती सिदार द्वारा अपने-अपने क्षेत्र विशेषकर वनांचल क्षेत्रों में जर्जर स्कूल भवनों, आश्रम-छात्रावासों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य संस्थानों की वास्तविक स्थितियों पर भी चर्चा करते हुए जनप्रतिनिधियों द्वारा नवीन भवन निर्माण तथा मरम्मत योग्य भवनों के सुधार कार्यों को वार्षिक कार्ययोजना में शामिल करने का सुझाव दिया गया, जिसे चर्चा उपरांत अनुमोदन सूची में शामिल किया गया। साथ ही जनप्रतिनिधियों के महत्वपूर्ण सुझाव को कार्यवाही विवरण में लेने के लिए निर्देशित भी किया गया।
बैठक में राज्य शासन की गाइडलाइन के अनुरूप प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष उत्खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कौशल विकास, स्वच्छता, कृषि, महिला एवं बाल विकास, मानव संसाधन, ऊर्जा तथा भौतिक अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया। प्रत्यक्ष उत्खनन प्रभावित क्षेत्रों में लैलूंगा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार एवं छाल क्षेत्र शामिल हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं के विस्तार हेतु अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कुछ भवनों की तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया। बैठक के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने डीएमएफ से संचालित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने एजेंडा अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत कार्यों की सेक्टरवार समीक्षा भी की।
बैठक में परियोजना प्रबंधन इकाई, गौण खनिज से प्राप्त डीएमएफ राशि, अक्षय निधि, आगामी पांच वर्षों में संभावित प्राप्त राशि के आधार पर पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना तथा वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में गौण खनिजों से डीएमएफ मद में 98 लाख 15 हजार 680 रुपए प्राप्त हुए हैं। इस राशि को गौण खनिज प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी एवं मूलभूत विकास कार्यों में उपयोग करने पर सहमति बनी। बैठक में रायगढ़ जिले अंतर्गत स्वीकृत गौण खनिज खदानों की तहसीलवार जानकारी भी प्रस्तुत की गई। इसमें रेत, क्वार्टजाइट, निम्न श्रेणी चूना पत्थर, डोलोमाइट, साधारण पत्थर, पोर्सेलीनाइट, फायरक्ले तथा कापू मिट्टी जैसी खदानों का उल्लेख किया गया। जिले में कुल 45 गौण खनिज खदानों की जानकारी बैठक में साझा की गई।
बैठक में यह भी बताया गया कि भारत सरकार के फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय से रायगढ़ जिले के खनिज प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। इसके तहत धरमजयगढ़ में एग्री प्रोसेसिंग यूनिट, लैलूंगा में जन औषधि एवं मेडिसिनल यूनिट तथा घरघोड़ा क्षेत्र में एक अन्य यूनिट स्थापित की जाएगी। इन परियोजनाओं में 40 प्रतिशत राशि भारत सरकार एवं 60 प्रतिशत राशि डीएमएफ मद से व्यय की जाएगी।
बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक न्यास निधि में कुल 643.79 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इनमें से 538.22 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है। शेष बचत राशि 129.03 करोड़ रुपए है। वहीं आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 125 करोड़ रुपए प्राप्त होने की संभावना व्यक्त की गई, जिसके आधार पर कुल 254.03 करोड़ रुपए की कार्ययोजना का अनुमोदन भी किया गया। बैठक में हाथी विचरण प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन सुगम बनाने के लिए सडक़ों के निर्माण एवं उन्नयन को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई। लैलूंगा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार एवं छाल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को केंद्र में रखते हुए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, आश्रम-छात्रावासों तथा स्वास्थ्य केंद्रों के नवीन निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया। बैठक में आगामी पांच वर्षों को ध्यान में रखते हुए 1246 कार्यों के लिए 254 करोड़ रुपए से अधिक की राशि की संभावित कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
डीएमएफ मद से 104 करोड़ के 392 विकास कार्यों को मिली मंजूरी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अधोसंरचना को प्राथमिकता
जर्जर स्कूल, आश्रम-छात्रावास और आंगनबाड़ी भवनों के मरम्मत एवं नवीन निर्माण के प्रस्ताव शामिल



