बरमकेला। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीणों को घर बनाने के लिए सरकार ने किस्त तो जारी कर दी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिना बालू के मकान निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है। बरमकेला क्षेत्र के ओडि़शा सीमा से लगे सुदूर वनांचल के ग्राम पंचायत झाल, हट्टापाली, जीरापाली, करनपाली, जोगनीपाली और कोकबाहल के हितग्राही पिछले करीब 20 दिनों से मकान निर्माण शुरू नहीं कर पा रहे हैं। वजह साफ हैकृक्षेत्र में बालू की उपलब्धता ही नहीं है।
स्थिति इतनी विचित्र हो चुकी है कि बालू वही ला पा रहा है जिसके पास खुद का ट्रैक्टर है और जो रात के अंधेरे में चोरी-छिपे खनन क्षेत्र तक पहुंचने का जोखिम उठा सके। बताया जा रहा है कि दिन के समय प्रशासन द्वारा ड्रोन कैमरे से सख्त निगरानी की जा रही है, जिसके कारण बालू लाने का वैधानिक रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। नतीजा यह कि प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही किस्त मिलने के बावजूद अपने ही घर के निर्माण के लिए भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन ने खनन पर सख्ती कर दी है तो यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर वैध रूप से बालू कहां से और कैसे मिलेगी। खनन का ठेका अब तक किसी को नहीं दिया गया है, वहीं महानदी क्षेत्र से बालू लाने वालों पर पुलिस कार्रवाई कर ट्रैक्टर जब्त कर रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजना आखिर जमीन पर कैसे पूरी होगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक असमंजस और अव्यवस्था के कारण योजना का लाभ लेने वाले लोग ही सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। मकान निर्माण की समय-सीमा निकलती जा रही है और लाभार्थी बालू के अभाव में असहाय बने हुए हैं।
बिना बालू कैसे बनेगा हितग्राहियों का घर, प्रधानमंत्री आवास योजना पर बालू संकट की मार
किस्त मिली लेकिन सामग्री नहीं, ग्रामीण पूछ रहेकृवैधानिक बालू आखिर मिलेगा कहाँ?



