पखांजुर से संवाददाता हरण बिस्वास की रिपोर्ट
पखांजुर- कांकेर जिले के पखांजूर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध कितना भी पुराना और सुनियोजित क्यों न हो, कानून के लंबे हाथ आखिरकार सच्चाई तक पहुंच ही जाते हैं। झाडिय़ों में मिले एक मानव कंकाल से शुरू हुई जांच ने न सिर्फ एक अंधे कत्ल का खुलासा किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक साइबर तकनीक और फील्ड इंटेलिजेंस के समन्वय से कैसे जटिल मामलों को सुलझाया जा सकता है।
पूछताछ ने खोला पूरा घटनाक्रम
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब दिनेश दुग्गा को हिरासत में लिया गया और कड़ी पूछताछ की गई, तो उसने अपराध स्वीकार कर लिया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि हत्या पूर्व नियोजित थी और इसमें दो अन्य लोग शामिल थे। आरोपी ने स्वीकार किया कि निजी संबंधों में उपजे विवाद को उसने अपराध का रूप दे दिया।
कंकाल बना जांच की कड़ी
22 जनवरी 2026 को ग्राम बड़ेकापसी में रनोबाई उसेण्डी के खेत के पास झाडिय़ों में मानव कंकाल मिलने की सूचना के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी। सूचना मिलते ही पखांजूर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके को सील किया और मर्ग कायम कर हर एंगल से जांच शुरू की। शुरुआती दौर में शव की पहचान चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन पुलिस ने मौके से मिले अवशेषों और गुमशुदगी रिकॉर्ड के आधार पर मृतिका की पहचान संगीता उसेण्डी (22 वर्ष) के रूप में की। पुलिस अधीक्षक श्री निखिल अशोक राखेचा के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने इस मामले को प्राथमिकता में लिया। साइबर सेल द्वारा कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट्स का विश्लेषण किया गया। इसी तकनीकी जांच में यह सामने आया कि संगीता की अंतिम गतिविधियां मुख्य आरोपी दिनेश दुग्गा के इर्द-गिर्द केंद्रित थीं, जिससे पुलिस की जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।
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पुलिस कार्रवाई से मिला स्पष्ट संदेश
मामले में दिनेश दुग्गा (21 वर्ष)- मुख्य आरोपी समनदीप पन्ना (20 वर्ष) – सह-आरोपी एक विधि से संघर्षरत नाबालिग के खिलाफ धारा 103(1) एवं 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह हत्याकांड न सिर्फ प्रेम संबंधों में बढ़ते अपराधों पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि रिश्तों में उपजे विवाद का समाधान हिंसा नहीं हो सकता। साथ ही यह मामला पुलिस की सक्रियता और तकनीकी दक्षता का उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने महीनों पुराने अंधे कत्ल को सुलझाकर पीडि़ता को न्याय की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया।
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साजिश, अपराध और सबूत मिटाने की कोशिश
16 नवंबर 2025 की रात की घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को झाडिय़ों में फेंककर यह मान लिया था कि मामला कभी उजागर नहीं होगा। मोबाइल फोन को नष्ट कर साक्ष्य मिटाने की कोशिश भी की गई, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड और लगातार निगरानी ने उनकी यह सोच गलत साबित कर दी।



