रायपुर। प्रदेश में मनरेगा कानून में किए गए संशोधन के विरोध में कांग्रेस आज से पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करेगी। कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचकर ग्राम पंचायतों में लोगों को मनरेगा में हुए बदलाव और उससे पडऩे वाले असर की जानकारी देंगे। यह फैसला दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) की बैठक में लिया गया। बैठक में तय किया गया कि, देशभर में मनरेगा को लेकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान शुरू किया है। प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि, केंद्र सरकार ने मनरेगा के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की है। पार्टी का आरोप है कि नए कानून से मजदूरों को मिलने वाली काम की कानूनी गारंटी कमजोर हो रही है। जिसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ेगा। कांग्रेस ग्राम सभाओं के जरिए मजदूरों को यह समझाएगी कि बदलाव से उनके अधिकार कैसे प्रभावित होंगे।
कांग्रेस का आरोप है कि, केंद्र सरकार 26 दिसंबर से पहले गांव-गांव में ग्राम सभाएं कराकर नए कानून को गरीबों के हित में बताने की कोशिश कर रही है, जबकि हकीकत इसके उलट है। पार्टी का कहना है कि नए प्रावधानों के जरिए मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत काम की गारंटी को कमजोर किया जा रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि, मनरेगा एक अधिकार था, नागरिकों को अधिकार दिया गया था कि हम अगर काम करना चाहें तो सरकार को हमको काम देना होगा। रामजी का नाम भी शामिल कर लिया गया, रामजी के साथ यहां छल हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने जिला, ब्लॉक, नगर और शहर कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों के साथ सभी मोर्चा संगठनों को निर्देश दिए हैं कि, वे कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को संगठित कर ग्राम सभाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। कांग्रेस का कहना है कि, आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और तथ्यों के साथ मजदूरों को उनकी स्थिति समझाई जाएगी।
कांग्रेस का तर्क है कि पहले गांव अपनी जरूरत के अनुसार काम तय कर सकते थे और मजदूरों को समय पर मजदूरी मिलती थी। नए ढांचे में इन अधिकारों पर असर पडऩे की आशंका है। पार्टी ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया है, जिसमें रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात कही गई है। कांग्रेस का कहना है कि, जब छत्तीसगढ़ में अभी भी ज्यादातर परिवारों को 100 दिन का काम नहीं मिल पा रहा, तो 125 दिन का वादा कैसे पूरा होगा। नए प्रावधानों के अनुसार खेती के मौसम में मनरेगा के काम नहीं कराए जाएंगे। सरकार इसे किसानों के हित में बता रही है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इससे ग्रामीण मजदूरों के कुल काम के दिन घटेंगे और उनकी आमदनी पर असर पड़ेगा।
कांग्रेस ने नए फंडिंग फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि अब राज्यों को योजना का करीब 40त्न खर्च खुद उठाना होगा, जिससे छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में प्रति परिवार औसतन करीब 52 दिन का ही रोजगार मिल पाया। सिर्फ 14 प्रतिशत परिवारों को पूरे 100 दिन का काम मिला। महिलाओं और आदिवासियों की भागीदारी ज्यादा होने के बावजूद उन्हें भी सीमित रोजगार ही मिल सका। कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा है कि, मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर रोजगार की गारंटी से छेड़छाड़ हुई, तो कांग्रेस गांव से लेकर संसद तक आंदोलन करेगी।
मनरेगा को लेकर कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन
आज से ग्राम पंचायतों में पहुंचकर लोगों को देंगे जानकारी



