जशपुर। जशपुर के एक युवक को पुलिस ने मरा घोषित कर दिया था। मर्डर केस भी बंद कर दिया था। वह युवक जिंदा पुलिस स्टेशन पहुंच गया। उसने पुलिस से कहा कि मैं जिंदा हूं, मेरा मर्डर नहीं हुआ है। रोजगार की तलाश में झारखंड गया था। वारदात सिटी कोतवाली क्षेत्र की है।
जानकारी के मुताबिक, युवक का नाम सीमित खाखा (30) है, जिसकी आधी जली हुई लाश 61 दिन पहले मिली थी। उसके तीन दोस्तों को मर्डर के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कमीशन के पैसों को लेकर हुए झगड़े में अपने दोस्त को मारने की बात कबूल की थी। अब सीमित खाखा के जिंदा होने से पुलिस मुश्किल में पड़ गई है। पुलिस इन सवालों से जूझ रही है कि गिरफ्तार लोगों ने असल में किसे मारा था, वह कौन था जिसकी अधजली हुई लाश मिली थी, सीमित खाखा के दोस्तों ने मर्डर की बात क्यों कबूल की? ये सवाल पुलिस को परेशान कर रहे हैं।
शनिवार की रात पूरा मामला उस समय पलट गया, जब तथाकथित मृतक सीमित खाखा ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना खलखो के साथ सिटी कोतवाली थाना पहुंचा। सरपंच कल्पना खलखो ने बताया कि सीमित झारखंड से आने वाली बस से उतरा और सिटोंगा जाने के लिए ऑटो में बैठा। ऑटो चालक सीमित को पहचानता था। उसी ने फोन कर सूचना दी कि जिस युवक की हत्या के आरोप में लोग जेल में हैं, वही युवक जिंदा ऑटो में बैठा है। इसके बाद सीमित को सीधे थाना लाया गया। इस दौरान सीमित खाखा ने पुलिस को बताया कि वह रोजगार की तलाश में झारखंड गया था। रांची पहुंचने के बाद वह अपने साथियों से अलग हो गया। गिरिडीह जिले के सरईपाली गांव में खेतों में मजदूरी करने लगा। सीमित खाखा ने बताया कि उसके पास मोबाइल नहीं था, जिसके कारण वह अपने परिजनों या गांव के लोगों से संपर्क नहीं कर सका। वह क्रिसमस मनाने के लिए घर लौट रहा था, तभी यह मामला सामने आया। उसे मर्डर के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
आरोपियों की होगी रिहाई- एसएसपी
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि वास्तविक मृतक की पहचान के लिए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पूर्व में कार्रवाई की गई थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों की रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। दरअसल, 22 अक्टूबर को सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पुरनानगर-बालाछापर के बीच स्थित तुरीटोंगरी जंगल में युवक की अधजली लाश मिली थी। शव एक गड्ढे में पड़ा था और उसका चेहरा सहित शरीर का अधिकांश हिस्सा जला हुआ था। पुलिस ने पंचनामा और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद मर्ग कायम किया। शव का पोस्टमॉर्टम कराया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत को हत्या बताया गया, जिसके बाद की धारा 103(1) और 238(क) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
शराब के विवाद में हत्या
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि ग्राम सिटोंगा निवासी सीमित खाखा कुछ दिन पहले अपने साथियों के साथ झारखंड के हजारीबाग मजदूरी करने गया था। उसके साथी लौट आए थे, लेकिन सीमित वापस नहीं आया। पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर को सीमित खाखा अपने साथियों रामजीत राम, विरेंद्र राम और नाबालिग के साथ जशपुर लौटा था। बस से उतरने के बाद सभी बांकी टोली स्थित बांकी नदी पुलिया के पास पहुंचे, जहां शराब पीने के दौरान कमीशन राशि को लेकर विवाद हुआ। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान रामजीत राम ने सीमित के सीने में चाकू से वार किया, जबकि विरेंद्र राम ने लोहे की रॉड से हमला किया। इससे सीमित की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या को छिपाने के लिए आरोपियों ने शव को करीब 400 मीटर दूर जंगल के गड्ढे में डालकर पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश की।
मजिस्ट्रेट के सामने हुई थी शव की पहचान
अधजली लाश की पहचान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (नायब तहसीलदार) के समक्ष कराई गई थी। जहां सीमित खाखा की मां, पिता और भाई ने शव को सीमित खाखा का होना स्वीकार किया। पुलिस ने फोरेंसिक एक्सपर्ट से घटनास्थल का सीन ऑफ क्राइम रिक्रिएशन भी कराया। गिरफ्तार आरोपियों के कथन न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने कराए गए। जहां उन्होंने हत्या का अपराध स्वीकार किया। सभी प्रक्रियाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई थी। इस मामले में पुलिस ने पहले रामजीत राम, वीरेंद्र राम और नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा था। इसके बाद में फरार आरोपियों शीतल मिंज (39) और जीतू राम (32) को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1), 238(क), 61(2) और लूट की धारा 127(1), 309(4), 298, 351(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया। जिन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल दिया गया।



