रायगढ़। चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को उसके अतीत स्मरण कराते हुए जिला भाजपा अध्यक्ष अरुण धर दीवान ने कहा कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के पहले अपनी ही पार्टी का अतीत झांक कर देख लेना चाहिए । कांग्रेस को लाभ पहुंचाने वाले पांच चुनाव आयुक्तों को कांग्रेस ने राज्यपाल,मंत्री,राज्यसभा सांसद और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी बनाकर उपकृत किया।
सत्ता रहते हुए जिन चुनाव आयुक्तों ने कार्यकाल पूरा किया उन्हें कांग्रेस ने बाद में पद देकर उपकृत किया उनसे निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। अरुण धर दीवान ने राहुल गांधी को चुनाव जीतने के पहले जनता का दिल जीतने की सलाह देते हुए कहा महाराष्ट्र चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने जो आरोप लगाए थे चुनाव आयोग ने बकायदा उनका जवाब अपनी अधिकृत वेबसाइट पर जारी किया उसके बाद भी वे आरोप लगाते ही रहे कि चुनाव आयोग कोई जवाब नहीं देता। 1982 से 1985 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त आर के त्रिवेदी के कार्यकाल में कांग्रेस को लोसभा में 404 सीटे मिली और कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला। बाद में कांग्रेस ने आर के त्रिवेदी को गुजरात का राज्य पाल बनाया था। 1990 में मुख्य चुनाव आयुक्त रही बी एस रमादेवी को वर्ष 1997 के कांग्रेस के समर्थन वाली सरकार ने हिमाचल का राज्यपाल बनाया ।1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टी एन शेषन पद छोडऩे के बाद कांग्रेस में शामिल हुए और 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर भाजपा के नेता लाल कृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। जब एक चुनाव आयुक्त सत्ता धारी दल की टिकट पाकर चुनाव लड़े तो उनकी निष्पक्षता पर किसी ने सवाल नहीं किया । खाता ना बही गांधी परिवार जो कहे वो सही। राजीव गांधी की हत्या होने के बाद पूरे देश के चुनाव स्थगित कर दिए गए थे जबकि पहले चरण में राजीव अमेठी का चुनाव लड़ चुके थे और वोटिंग हो चुकी थी।नियमानुसार किसी एक प्रत्याशी की मृत्यु पर पूरे देश का चुनाव स्थगित नहीं किया जा सकता है। 1996 से 2001 के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त एम एस गील कार्यकाल पूरा होने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए और बाद में मनमोहन सरकार में मंत्री भी बनाए गए।2001 से 2004 के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त रहे जे एम लिंगदोह भी कांग्रेस में शामिल हो गए थे। संवैधानिक पद पर रहने के बाद सीधे सत्ता धारी दल मे शामिल होकर उपकृत हुए भाजपा ध्यक्ष दीवान में कहा कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दुरुपयोग की सीमाएं तोड़ दी आज किस मुंह से राहुल गांधी आम जनता के आमने चुनाव आयोग पर उंगली उठा रहे है यदि उनमें हिम्मत है तो वे जवाब दे कि चुनाव आयुक्त का पद संभालने वाले लोगों को कांग्रेस में शामिल क्यों किया गया और उन्हें राज्यपाल राज्यसभा सांसद मंत्री क्यों बनाया गया आखिर कांग्रेस को उनसे क्या लाभ हुआ ? यह भी आम जनता को बताना चाहिए।जन इन अधिकारियों को कांग्रेस ने पद देकर उपकृत किया तब लोकतंत्र पर कोई आंच नहीं आई आज जब कांग्रेस सत्ता से विमुख हो गई तो उसे संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग नजर आ रहा है। अरुण धर दीवान ने कहा प्रधान मंत्री रहते हुए स्वर्गीय इंदिरा गांधी के धारा 356 का इस्तेमाल करते हुए 50 बार से अधिक निर्वाचित राज्य सरकारों को बर्खास्त किया क्योंकि इन राज्यों में कांग्रेस की सरकार नहीं थी। यही नहीं संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर को हराने के लिए कांग्रेस ने 74333 वोट खारिज करवाए थे। बाबा साहेब ने इस निर्णय के खिलाफ हलफनामा दाखिल किया था।यह भारत का पहला चुनावी भ्रष्टाचार था जो डॉ आंबेडकर को हराने के लिए कांग्रेस और सीपीआई ने मिलकर किया था। महाराष्ट्र की मुंबई की उत्तर लोकसभा सीट पर 74,333 वोट ख़ारिज कर दिए गए थे। हार जीत का अंतर 14,561 वोट था। इसके खिलाफ डॉ आंबेडकर ने 21 अप्रैल 1952 को केंद्रीय चुनाव आयोग में 18 पेज की याचिका दायर की थी। संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग के काले अध्याय से कांग्रेस का अतीत भरा हुआ है राहुल गांधी को अपना ही अतीत देखने की सलाह दी है।
चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के पहले कांग्रेस को अतीत देखने की सलाह
सत्ता रहते चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल, मंत्री,राज्यसभा सदस्य बनाकर उपकृत किया-अरुण धर दीवान, जिला भाजपा अध्यक्ष अरुण धर दीवान ने कहा सत्ता रहते कांग्रेस ने लाभ पहुंचाने वाले चुनाव आयुक्तों को पद देकर किया उपकृत
