घरघोड़ा। नगर पंचायत घरघोड़ा एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गया है। वार्ड क्रमांक 5 में करीब 6.40 लाख रुपये की लागत से दीप्ती कंस्ट्रक्शन द्वारा बनाया गई सीसी सडक़ विवादों में आ गई है। हैरान करने वाली बात यह है नियमो को ताक मे रख कर अच्छी सडक़ होने के बाद भी दोबारा सीसी सडक़ बना दी गई। वह भी रात के अंधेरे में बिना किसी गुणवत्ता मापदंड का पालन किए। कार्य के समय जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी के अनुपस्थित रहना अनेक सवालों को जन्म देता है।
वार्ड वासियो ने आरोप लगाया है कि सडक़ निर्माण में गिट्टी और सीमेंट की गुणवत्ता बहुत ही घटिया किस्म की सामग्री का उपयोग किया गया है। सडक़ बने मुश्किल से एक सप्ताह भी नहीं हुआ है और सीमेंट की परत उखडऩे लगी है। और उड़ती हुई सीमेंट लोगो के घरों में घुस रही है, बाहर खड़ी गाडिय़ाँ सफेद परत से ढँक गई हैं। घटिया निर्माण से वार्डवासियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
जब घटिया निर्माण की शिकायत नगर पंचायत अधिकारी दीपिका भगत से गई तो तो जवाब मिला जब काम हो रहा था, तब सामने खड़े होकर क्यों नहीं रोका? नगर पंचायत अधिकारी का यह जवाब न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी से पल्ला झाडऩे जैसा है। जबकि नगर पंचायत कार्यलय द्वारा कराये जाने वाले कार्य की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से नगर पंचायत सीएमओ और इंजीनियर की होती है। बता दे की बिना लेआउट , इंजीनियर की अनुपस्थिति में हुआ कार्य सीधे तौर पर ठेकेदार को अंदरूनी संरक्षण मिलने की ओर इशारा करता है।
न कोई नोटिस, न कोई कार्रवाई
शिकायत के सप्ताह बीतने के बावजूद ठेकेदार को न तो नोटिस जारी किया गया, न ही निर्माण स्थल पर कोई ठोस जांच की गई। आला अधिकारी फिलहाल मामले मे चुप्पी साधे हुए हैं। नगर पंचायत अधिकारी का कहना है कि एक ही इंजिनियर है वह भी धरमजयगढ़ मे रहता है इंजीनियर को जांच के लिए बोल दिया गया है लेकिन बड़ा सवाल है सप्ताह भर बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नजर नहीं आ रही है तो वार्ड वासियो के मन मे अनेक सवाल है जिसमे जांच कब होगी और कितनी निष्पक्ष होगी और जाँच मे जनता को क्य न्याय मिलेगा। वार्डवासियो ने घटिया सडक़ निर्माण को उखाडऩे के साथ निर्माण एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने की मांग कर रहे है।
अब देखना यह होगा कि हर बार की तरह इस मामले को दबाया दिया जाएगा या ठेकेदार पर कार्यवाही की जाती है । सबसे बड़ी बात वार्डोवासियो को क्या न्याय मिलेगा। वार्डोवासियो को न्याय तभी मिलेगा जब सडक़ उखाड़ी जाएगी या उसे उखाड़ कर फिर से बनाई जाएगी वह भी गुणवत्ता के साथ। बहरहाल देखना होगा की पुरे मामले पर क्या कार्यवाही होती है क्या जिम्मेदार अधिकारी ठेकेदार पर कार्यवाही होती है या वार्डोवासी हमेसा की तरह कागजो मे ठगे जायेंगे।