जशपुर। पुलिस ने 51 लाख की इंटरस्टेट शराब पकड़ी है। बताया जा रहा है बिहार चुनाव में खपाने के लिए ले जाया जा रहा था। तस्करों का सिंडिकेट चुनाव के लिए स्टॉक करने वाला था, लेकिन बिहार पहुंचने से पहले ही पकड़े गए। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है।
मिली जानकारी के मुताबिक जशपुर पुलिस की 5 महीने में ये दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इसके पहले 1 करोड़ 50 लाख की शराब पकड़ी गई थी। पंजाब से ही सेम रूट से लाया गया था। करीब 2100 किलोमीटर के सफर के लिए कई ड्राइवर चेंज होते हैं। एक ड्राइवर को 45 हजार मिलते हैं। शराब लोड ट्रक के ड्राइवर्स को पता नहीं होता कि ट्रक में क्या लोड है। उन्हें बताए शहर तक पहुंचाना होता है। तस्करी से जुड़े लोग आते हैं और ट्रक से माल अनलोडिंग कर खाली गाड़ी भेज देते हैं। इसी तरह अलग-अलग ट्रकों का इस्तेमाल होता है। इस रिपोर्ट में विस्तार से पढि़ए कैसे पंजाब से छत्तीसगढ़ के रास्ते बिहार पहुंचती है शराब ? दरअसल, 4 अगस्त 2025 की सुबह जशपुर पुलिस को इनपुट मिला कि एक संदिग्ध ट्रक क्रमांक यूपी-12एटी1845 में अवैध शराब लोडकर जशपुर क्षेत्र से गुजरने वाला है। ट्रक चंडीगढ़ से रवाना होकर बिहार की ओर बढ़ रहा है। मुखबिर से पक्का इनपुट मिलने के बाद जशपुर पुलिस एक्टिव मोड पर आ गई।
जशपुर सिटी कोतवाली थाना प्रभारी आशीष कुमार तिवारी के नेतृत्व में टीम गठित हुई। नेशनल हाईवे-43 पर आगडीह गांव के पास कड़ी नाकाबंदी की गई। जैसे ही संदिग्ध ट्रक पास आया, पुलिस ने उसे घेराबंदी कर रोका। ट्रक की तलाशी ली गई। इस दौरान ट्रक से 734 कार्टूनों में भरी 6 हजार 588 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई, जिसकी कीमत 51 लाख है। पुलिस ने जब ट्रक ड्राइवर से दस्तावेज मांगे तो वह नहीं दे सका। मौके पर ही ट्रक ड्राइवर चिमाराम (26) को अरेस्ट किया गया। ड्राइवर राजस्थान के बाड़मेर जिले के बायतु थाना इलाके का रहने वाला है।
आरोपी ने खोला तस्करी रूट का राज
इस दौरान जशपुर पुलिस ने ट्रक ड्राइवर चिमाराम से पूछताछ की। चिमाराम ने बताया कि शराब माफिया का लोडिंग प्वाइंट पंजाब का चंडीगढ़ है। लोडिंग के बाद वे हिमाचल प्रदेश होते हुए क्क के लखनऊ आते हैं। यहां कुछ देर रुकने के बाद अगला पड़ाव छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर होता है। इसके बाद जशपुर से झारखंड का रांची और उसके बाद अगला पड़ाव बिहार होता है। यही अंतिम डेस्टिनेशन है। यहां से पटना समेत अलग-अलग जिलों में अवैध शराब की डिलीवरी होती है। ड्राइवर को सिर्फ लोकेशन बताया जाता है। माफिया के लोग लोडिंग और अनलोडिंग का काम करते हैं।
ड्राइवर को दिए थे 45 हजार रुपए
ट्रक ड्राइवर चिमाराम ने बताया कि उसे शराब तस्करों से 45 हजार रुपए मिले थे। उसकी जिम्मेदारी ट्रक को हिमाचल प्रदेश से झारखंड के रांची ले जाने की थी। यहां से दूसरा ड्राइवर ट्रक लेकर जाता। सिंडिकेट की इसी प्लानिंग की वजह से ट्रक आसानी से पहुंच जाता है। शराब तस्करी के नेटवर्क में हर मेन पड़ाव पर ट्रक ड्राइवर बदल दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि किसी एक व्यक्ति की पहचान न हो सके। वे पुलिस के चंगुल से बच सकें, लेकिन पुलिस ने चंडीगढ़ से शुरू होकर बिहार तक पहुंचने वाली अवैध शराब की सप्लाई लाइन को तोड़ दिया।
बड़े सिंडिकेट के शामिल होने का शक
साथ ही एसएसपी ने बताया कि पुलिस को शक है कि इस तरह की शराब तस्करी में एक बड़े सिंडिकेट के शामिल होने की संभावना है, जो बेहद शातिराना तरीके से विदेशी शराब की तस्करी कर रहा है। तस्करी में शामिल सिंडिकेट का पता लगाने के लिए पुलिस की जांच जारी है।
जशपुर पुलिस ने किया इंटरस्टेट शराब तस्करी का भांडाफोड़
पंजाब से छत्तीसगढ़ के रास्ते बिहार जा रही थी 51 लाख की अवैध शराब से भरी ट्रक, चुनाव में खपाने की थी प्लानिंग, चालक गिरफ्तार
