रायगढ़। पिछले कुछ दिनों से मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डाक्टर मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। अब उनके साथ जूनियर रेजिडेंट (जेआर), सीनियर रेजिडेंट (एसआर), पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी), मेडिकल ऑफिसर (एमओ) और एमबीबीएस डाक्टर भी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले के डाक्टरों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को मनवाने के लिए गुरुवार से मेडिकल कालेज अस्पताल के बाहर टेंट लगाकर शुरू कर दी है। यह हड़ताल चरणबद्ध तरीके से चलेगा। इस संबंध में आंदोलन कर रहे डाक्टरों ने बताया कि पहले चरण में ओपीडी और वार्ड की सेवा को बंद किए हैं, लेकिन इमरजेंसी ड्यूटी अभी भी जारी रखें हैं, ताकि गंभीर मरीजों को समस्या का सामना न करना पड़े। हालंाकि ओपीडी व वार्ड की सेवा बंद होने से अस्पताल की सेवाएं चरमरा गई है, वहीं डाक्टरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो तीन दिन बाद आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। चिकित्सकों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। प्रदर्शनकारी डाक्टरों का कहना है कि वे मरीजों को होने वाली असुविधा को समझते हैं, लेकिन अपनी मांगों को मनवाने के लिए उनके पास हड़ताल ही एकमात्र विकल्प बचा है। इस हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, खासकर दूर-दराज से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। यदि आपातकालीन सेवाएं भी बंद होती हैं, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस आंदेालन में जिलेभर से करीब 200 डाक्टर शािमल है, जिससे आंदोलन के पहले दिन गुरुवार को मेडिकल कालेज अस्पताल के कई सुविधाओं पर इसका असर देखने को मिला। वहीं डाक्टरेां की कमी के चलते गायनिक विभाग में अत्यंत गंभीर मरीजों का ही सर्जरी किया गया, साथ ही बाकी मरीजों को वेटिंग में रखा गया था। इसी तरह अन्य सर्जरी विभाग की भी यही स्थिति रही। इसके अलावा सोनोग्राफी में भी सिर्फ इमरजेंसी केस को ही सोनोग्राफी किया गया, बाकी मरीजों को अगले दिन का डेट दिया गया था, जिससे मरीजों को वापस लौटना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे डाक्टरों ने बताया कि आज आंदोलन का पहल दिन था, इससे एक-एक डाक्टरेां को ड्यूटी लगाई गई है, वहीं अगले तीन दिनों तक उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो केजुअल्टी सेवा भी पूरी तरह से बंद कर देंगे, इससे मेडिकल कालेज के साथ-साथ जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएससी में भी समस्या बढ़ जाएगी।
डाक्टरों की ये है प्रमुख मांगे
17 सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से इंटन्र्स के लिए 30 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन, पीजी के लिए 1.20000 प्रतिमाह वेतन, बांड वाले एसआर एवं एमओ के स्टाइपेंड में पर्याप्त वृद्धि,सभी केडर्स के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि, बॉड की अवधि में गुनिर्मध्युक छूट एवं पारदर्शी निती, ड्यूटी आवर्स का पुर्नाकरण एवं 48 घंटे की सीमा का सख्ती से पालन, सभी डाक्टरों के लिए सुरक्षित एवं उचित आवास, आधुनिक उपकरणों, दवाओं एवं आवश्यक संसाधनों की मांग, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डाक्टरेां के लिए भत्ता एवं प्रोत्साहन राशि, जिला अस्पताल के उन्नयन एवं सभी विभागों में पर्याप्त विशेषज्ञ, दुर्घटना, आपातकालिन एवं कठिन परिस्थितियों में कार्यरत डाक्टरों के लिए बीमा कवच, आरएमओ एवं अन्य संविदा पदों का नियमितिकरण एवं स्थायीकरण, चिकित्सकों पर बढ़ते हिंसा एवं उत्पीडऩ के मामलों में कड़ी कार्रवाई, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सुविधाएं, मेडिको-लीगल कार्यों के लिए पर्याप्त मानदेय एवं समयबद्ध भुगतान सहित अन्य मांगे शामिल है।
17 सूत्रीय मांग को लेकर डाक्टरों ने ओपीडी सेवा बंद कर शुरू किया हड़ताल
तीन दिन बाद आपातकालीन सेवाएं भी ठप करने की चेतावनी



