धरमजयगढ़। छाल क्षेत्र में दक्षिण पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (स्श्वष्टरु) की खदान विस्तार योजना को लेकर ग्रामीणों का असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। खदान विस्तार के लिए प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में विरोध की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में महज आपत्ति दर्ज कराने के बजाय सामूहिक रूप से विरोध की रणनीति तैयार करने की बात कही है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों के विस्तार से पहले क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति सुधरनी चाहिए। उनका आरोप है कि वर्षों से खनन गतिविधियां संचालित होने के बावजूद पानी, सडक़ और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विस्थापन और रोजगार से जुड़े मुद्दे भी ग्रामीणों की नाराजगी का प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि खदान का विस्तार होता है तो उसका सीधा असर जमीन, जलस्रोत, खेती और आसपास के रहवासियों पर पड़ेगा। ऐसे में उनकी पुरानी समस्याओं का समाधान किए बिना विस्तार को आगे बढ़ाने का विरोध किया जाएगा।
विधायक और जनप्रतिनिधियों का भी ग्रामीणों को समर्थन
विरोध को उस समय और राजनीतिक बल मिलता दिखाई दिया जब क्षेत्रीय विधायक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया। ग्रामीणों के अनुसार आगामी जनसुनवाई में केवल औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने के बजाय अपनी जमीन और अधिकारों को लेकर सामूहिक रुख अपनाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक खदान विस्तार के लिए जमीन पर कोई नया कदम उठाने का विरोध किया जाएगा। अब प्रस्तावित विस्तार की चर्चा के साथ ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि पुराने विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मामलों का पूर्ण समाधान हुआ या नहीं और नए विस्तार की स्थिति में प्रभावित लोगों के अधिकार कैसे सुरक्षित किए जाएंगे।
अब जनसुनवाई बनेगी अगली परीक्षा
छाल में प्रस्तावित विस्तार को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी अब केवल गांवों तक सीमित नहीं रह गई है। यदि विरोध की यह रणनीति जनसुनवाई तक कायम रहती है तो प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के सामने ग्रामीणों की आपत्तियों का जवाब देना महत्वपूर्ण होगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि खनन विस्तार के साथ स्थानीय लोगों को पानी, सडक़, स्वास्थ्य, रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास के मामले में क्या ठोस और लिखित आश्वासन मिलेगा?



