रायगढ़। सावन मास भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है। इस पवित्र माह में शिवभक्त कांवड़ यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और विविध आयोजनों के माध्यम से भगवान शिव की आराधना करते हैं। ऐसे में स्वयंभू शिवलिंग वाले प्राचीन मंदिरों की अपनी विशेष धार्मिक महत्ता है। यही वजह है कि सावन के प्रत्येक सोमवार को पोरथधाम स्थित स्वयंभू शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
बरमकेला विकासखंड के अंतर्गत सरिया से लगभग 8 किलोमीटर दूर महानदी के पावन तट पर बसे ग्राम पोरथ की धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्ता दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। चित्रोत्पला महानदी के तट पर स्थित पोरथ तीन नदियों के संगम के लिए भी जाना जाता है। सावन सोमवार के अवसर पर आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर स्वयंभू शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
पोरथ की पावन भूमि अनेक धार्मिक मान्यताओं और किंवदंतियों को अपने भीतर समेटे हुए है। मान्यता है कि यहां पुराण प्रसिद्ध पुलस्य ऋषि का आश्रम भी रहा है। आज भी आश्रम परिसर में पूजा सामग्री के अवशेषों के साथ ऋषि से जुड़ी कई सामग्री सुरक्षित होने की बात कही जाती है।
पोरथ में स्वयंभू शिवलिंग के अलावा कपिलेश्वर महादेव मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर तथा कृष्ण गुरु आश्रम जैसे धार्मिक स्थल भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ चित्रोत्पला गंगा कही जाने वाली महानदी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
पोरथ का स्वयंभू शिव मंदिर है लोगों का आस्था का केंद्र
सावन सोमवार को जलाभिषेक व पूजा-अर्चना के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु



