सारंगढ़। महिला व बाल विकास विभाग ने सारंगढ़ के आशा निकेतन वृद्धाआश्रम में स्तन पान से जुड़ा कार्यक्रम किया। इस आयोजन में महिला एवं बाल विकास अधिकारी, परि. अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर और सुपरवाइजर सहित कई महिलाएं उपस्थित थीं। प्रशिक्षक और वीडियो प्रदर्शन के माध्यम से स्तनपान सिखाया गया और इस ज्ञान को जिले के सभी आंगन बाड़ी केंद्र के माध्यम से शिशु वती महिलाओं को समझाने के निर्देश महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने दिए। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि-स्तनपान सबसे प्राकृतिक चीजों में से एक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की यह माताओं और उनके शिशु दोनों के लिए स्वाभाविक रूप से होता है,इसमें समय व अभ्यास लगता है। और हर माँ की स्तनपान कहानी अलग होती है, लेकिन इन सभी कहानियों में एक बात समान है, वे अपने बच्चों को जीवन की सबसे स्वस्थ शुरुआत दे रहे हैं। स्तनपान शिशुओं को वह पोषण, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है जिसकी उन्हें मजबूत, स्वस्थ व बुद्धिमान बनने के लिए आवश्यकता होती है। स्तनपान कराने वाली माता को अपने साथी, परिवार, स्वास्थ्य कर्मी नियोक्ताओं और पूरे समुदाय के सहयोग की आवश्यकता होती है।
जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराएं
चाहे आप स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल या घर पर बच्चे को जन्म दें, जन्म के पहले घंटे के भीतर नवजात शिशु को स्तनपान कराने से स्तनपान सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ घंटों की देरी भी स्तनपान सफलता पूर्वक शुरू करने में मुश्किल पैदा कर सकती है। शिशु के जन्म के तुरंत बाद आपका शरीर शिशु का पहला दूध बनाता है, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं। यह गाढ़ा, अक्सर सुनहरे रंग का होता है व कम मात्रा में निकलता है, लेकिन शक्ति शाली एंटीबॉडी से भरपूर होता है, और नवजात शिशु को शुरुआती घंटों और दिनों में ठीक यही चाहिए होता है, जब उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली अभी विकसित हो रही होती है। मां का दूध पहले टीके की तरह काम करता है, जो आपके शिशु को हानिकारक बीमारियों से बचाने में मदद करता है। नवजात शिशुओं में दूध पीने की सहज प्रवृत्ति होती है और वे आमतौर पर स्तनपान सीखने के लिए तैयार होते हैं। जन्म के तुरंत बाद शिशु को त्वचा से त्वचा मिलाकर गोद में लेने से आपका शिशु के साथ गहरा जुड़ाव बनता है, शिशु गर्म रहता है व आपकी त्वचा से अच्छे बैक्टीरिया शिशु तक पहुंचते हैं, जो उसकी विकसित हो रही प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं। शुरुआती स्तन पान और त्वचा से त्वचा मिलाकर गोद में लेने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है व स्तनपान की शुरु आत आसान हो जाती है।
जन्म के पहले घंटे से लेकर 6 महीने की उम्र तक, आप का शिशु आपके दूध से ही सभी आवश्यक पोषण प्राप्त कर सकता है। इस दौरान उसे किसी और चीज की जरूरत नहीं होती – न ही किसी अन्य खाद्य पदार्थ या तरल पदार्थ की, यहां तक ??कि पानी की भी नहीं। अपने शिशु के 6 महीने का होने से पहले स्तनपान अलावा अन्य खाद्य पदार्थ या तरल पदार्थ देना दस्त जैसी बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है, जिससे आपका बच्चा पतला व कमजोर हो सकता है, और यह जानलेवा भी हो सकता है। माता -पिता व देखभाल करने वाले 6 महीने की उम्र से स्तनपान के अलावा नरम खाद्य पदार्थ देना शुरू कर सकते हैं और उन्हें 2 साल या उससे अधिक समय तक स्तन पान जारी रखना चाहिए।स्तनपान न केवल आपके शिशु के लिए अच्छा है, बल्कि माताओं के लिए भी अच्छा है! स्तनपान कराने वाली महिलाओं में स्तन और अंडाशय के कैंसर का खतरा भी कम होता है। स्तन के दूध में उपचार गुण होते हैं। प्रसव के बाद, किसी कुशल स्वास्थ्यकर्मी से स्तनपान संबंधी सहायता लें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपके बच्चे का स्तनपान से अच्छा जुड़ाव हो और वह सफलता पूर्वक दूध पी सके।
शिशु की ज़रूरतें और भूख का पैटर्न लगातार बदलता रहता है। ध्यान रखें और जब भी आपका शिशु भूख के लक्षण दिखाए, उसे स्तनपान कराएं। यदि आप बिना किसी समस्या के स्तन पान करा सकती हैं, तो अपने शिशु को दिन-रात जितनी बार चाहे उतनी बार स्तन पान कराएं। स्तन पान कराने का कोई निश्चित समय निर्धारित न करें। शिशु को स्वयं तय करने दें कि उसे कब और कितनी देर तक दूध पीना है। इसे रिस्पॉन्सिव फीडिंग कहा जाता है। यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि आपके शिशु को पर्याप्त दूध मिल रहा है और साथ ही, शिशु की जरूरतों के आधार पर आपके दूध उत्पादन को भी बढ़ावा देता है। एक तरफ के स्तन से पूरा दूध होने के बाद दूसरे स्तन का दूध पिलाये।अगर बच्चा बार-बार सो जाता है, तो इससे उसे मिलने वाले दूध की मात्रा पर असर पड़ सकता है। स्तनपान कराते समय शिशु को जगाए रखना यह सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है कि उसे पर्याप्त पोषण मिल रहा है। इससे शिशु में अच्छी नींद की आदतें विकसित करने में भी मदद मिल सकती है और वह दूध पीने को नींद से जोडऩा बंद कर सकता है।
उनके पैरों या हाथों को धीरे से स्पर्श करें। जैसे ही बच्चे सो जाएं, स्तनपान कराने की स्थिति बदलें या स्तन बदलें। अपने बच्चे को व्यस्त रखने के लिए उसके साथ गाना गाएं या बातें करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें। स्तनपान कराते समय आपके शरीर से बहुत सारा तरल पदार्थ निकल जाता है। इसीलिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना जरूरी है ताकि – शरीर में पानी की कमी न हो। इससे शरीर को दूध उत्पादन में भी मदद मिलेगी। दिन में 8-10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है। हालांकि पानी शरीर के लिए सबसे अच्छा है। आप दूध और ताजे फलों का रस भी पी सकते हैं। शिशुवती माता हमेशा अपने बच्चे को स्तनपान कराने में सक्षम नहीं हो सकती हैं। ऐसे में हाथ या किसी उपकरण की मदद से दूध पंप करना सुरक्षित है और दूध को इक_ा करें, ताकि आप जरूरत पडऩे पर अपने बच्चे को दूध पिला सकें। स्तन पान कराते समय बोतल, पैसिफायर का इस्तेमाल करने से बचें। पैसिफायर शिशु को शांत करने में तो अच्छे होते हैं, लेकिन इनसे शिशु समय से पहले ही स्तन पान छोड़ सकता है।



