रायगढ़। आषाढ़ शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को आज 24 जुलाई शुक्रवार को शाम 4 बजे से महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की बाहुडा रथयात्रा भव्य बाजे गाजे भजन कीर्तन के साथ निकाली गई। वहीं आठ दिन तक मौसी घर गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहने के पश्चात आज महाप्रभु अपने रथ पर विराजित होकर भव्य शोभायात्रा के साथ पुन: अपने मंदिर वापस लौटे और समूचा अंचल हरि बोलो के पवित्र मंत्र से गुंजायमान हो गया।
बाहुडा रथयात्रा का मार्ग
कीर्तन मंडलियों के जयघोष के साथ रथयात्रा गांजा चौक से प्रारंभ होकर हटरी चौक, गद्दी चौक, पैलेस रोड होते हुए मोतीमहल स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंची व पैलेस रोड़ में पं. ब्रजेश्वर मिश्र एवं श्री गोपीनाथ जीव मंदिर द्वारा और मोतीमहल, मंदिर प्रांगण में उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति उत्कलिका द्वारा महाप्रभु का भव्य स्वागत किया गया।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 25 जुलाई शनिवार को शाम 7 बजे महाप्रभु का सोनाभेष दर्शन होगा। यह छत्तीसगढ़ में सिर्फ रायगढ़ के इसी श्री जगन्नाथ मंदिर की विशेषता है जहां पुरी की परंपरा के अनुसार सोनाभेष मनाया जाता है।
सोनाभेष पूजा की खासियत
वर्ष में एक बार महाप्रभु वर्ष में केवल इसी एकादशी को अपने समस्त स्वर्ण अलंकारों और आयुधों के साथ पूर्ण राजकीय स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दिन मंदिर में केवल रसगुल्ले का भोग लगता है। यह भोग महाप्रभु श्री जगन्नाथ के साथ माता महालक्ष्मी के लिए भी अर्पित किया जाता है।वहीं इसे हरिशयन एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन से भगवान चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। यह योगनिद्रा कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तक रहेगी। इसी कारण इन चार महीनों में विवाह सहित सभी शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। वहीं श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि सोनाभेष दर्शन में सम्मिलित होकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त कर पुण्य के भागी बनें।



