जशपुरनगर। जिले के थाना कुनकुरी में पंजीबद्ध अपराध में विशेष न्यायालय (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम), जशपुर द्वारा आरोपी मनोज कुमार पाण्डेय (उम्र 44 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए 07 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया गया।
प्राप्त जानकारी अनुसार पीडि़ता द्वारा थाना कुनकुरी में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर बताया गया कि वर्ष 2024 में उसकी पहचान अभियुक्त मनोज कुमार पाण्डेय से हुई। दोनों एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। परिचय बढऩे पर अभियुक्त ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए पीडि़ता से प्रेम संबंध स्थापित किए तथा उससे विवाह करने का झूठा आश्वासन दिया। अभियुक्त के झूठे वादों एवं विश्वास में आकर पीडि़ता उसके साथ रहने लगी। अभियुक्त मनोज कुमार पाण्डेय ने दिनांक 07.03.2024 से 08.05.2025 के मध्य कुनकुरी एवं राजनांदगांव में विभिन्न स्थानों पर विवाह करने का झूठा विश्वास दिलाकर पीडि़ता के साथ कई बार शारीरिक संबंध स्थापित किए। इस दौरान अभियुक्त ने पीडि़ता को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का भरोसा दिया, उसके साथ पति-पत्नी की तरह रहा तथा पीडि़ता से जन्मे बच्चे को भी अपना नाम दिया। साथ ही पीडि़ता एवं उसके बच्चे के पालन-पोषण का आश्वासन भी देता रहा। कुछ समय बाद पीडि़ता को जानकारी मिली कि अभियुक्त पहले से विवाहित है तथा उसके बच्चे भी हैं। इसके बावजूद वह लगातार विवाह का झूठा भरोसा देकर पीडि़ता का शारीरिक एवं मानसिक शोषण करता रहा। जब पीडि़ता ने विवाह करने एवं साथ रखने की बात कही तो अभियुक्त ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया। इसके पश्चात पीडि़ता ने थाना कुनकुरी में शिकायत दर्ज कराई। उक्त शिकायत के आधार पर थाना कुनकुरी में अपराध क्रमांक 169/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(अ) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान पीडि़ता, गवाहों एवं संबंधित व्यक्तियों के कथन दर्ज किए गए तथा दस्तावेजी, वैज्ञानिक एवं अन्य आवश्यक साक्ष्य संकलित कर अभियोग पत्र विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय का निर्णय
प्रकरण की सुनवाई उपरांत विशेष न्यायाधीश श्री सतेंद्र कुमार साहू, विशेष न्यायालय (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम), जशपुर द्वारा दिनांक 23 जुलाई 2026 को निर्णय पारित किया गया। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा प्रभावी न्यायालयीन पैरवी के आधार पर अभियुक्त मनोज कुमार पाण्डेय को दोषी ठहराया। न्यायालय द्वारा अभियुक्त को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 के अंतर्गत 07 वर्ष के सश्रम कारावास एवं रू.1,000 /- अर्थदण्ड तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(अ) के अंतर्गत 03 माह के सश्रम कारावास से दंडित किया गया।
विवेचना एवं न्यायालयीन पैरवी
प्रकरण की विवेचना उप पुलिस अधीक्षक श्री भावेश समरथ के द्वारा गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए तथा समय-सीमा में अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रभावी न्यायालयीन पैरवी किए जाने के फलस्वरूप अभियुक्त को दोषसिद्धि एवं कठोर दण्ड प्राप्त हुआ। जिला अभियोजन अधिकारी सुरेष कुमार साहू, एडीपीओ श्री विपिन शर्मा द्वारा प्रकरण का गहन अध्ययन किया गया, प्रकरण में विषेष लोक अभियोजक श्री अजीत रजक द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को कठोर दंड दिलाया जा सका।



