रायगढ़। बीती रात से लगातार हो रही बारिश के बीच निगम प्रशासन की पूर्व-नियोजित रणनीति, सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई का प्रभाव शहरभर में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय के मार्गदर्शन में मानसून पूर्व तैयार की गई तकनीकी कार्ययोजना के कारण शहर के अधिकांश संवेदनशील एवं जलभराव संभावित क्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रित रही। परिणामस्वरूप नागरिकों को आवागमन एवं दैनिक गतिविधियों में किसी प्रकार की गंभीर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
मानसून प्रारंभ होने से पहले ही निगम प्रशासन द्वारा शहर के उन सभी क्षेत्रों का सर्वे कर चिन्हांकन किया गया था, जहाँ प्रत्येक वर्ष जलभराव की समस्या बनती रही है। इनमें पैठू डबरी, गर्ल्स कॉलेज, संजय कॉम्प्लेक्स, दुग्ध डेयरी, लक्ष्मीपुर पुलिया, सिद्धिविनायक कॉलोनी, स्टेडियम क्षेत्र, खेतपारा, गुलमोहर कॉलोनी, मोदी नगर, चिरंजीवीदास नगर, प्रेम नगर, चंद्रनगर, नवापारा, ऑक्सीजोन, चंदगीराम नगर, गांधी नगर, सोनुमुड़ा, मि_ूमुड़ा, सावित्री नगर, गोगा राइस मिल, सीएमएचओ तिराहा, पतरापाली एवं फ्रेंड्स कॉलोनी सहित अन्य निचले क्षेत्र शामिल हैं।
इन सभी स्थानों पर बाढ़ एवं आपदा नियंत्रण के तहत बरसात शुरू होते ही निगम द्वारा एक-एक कर्मचारी की विशेष ड्यूटी निर्धारित की गई थी, जिन्हें नाले- नालियों से जल निकासी व्यवस्था पर सतत निगरानी एवं किसी भी अवरोध की तत्काल सूचना देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी सुनियोजित व्यवस्था के कारण अधिकांश क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनने ही नहीं पाई। बारिश के दौरान जहाँ भी जल निकासी प्रभावित होने की संभावना बनी, वहाँ निगम की टीम ने बिना समय गंवाए तत्काल कार्रवाई की। पैठू डबरी नाला एवं रामभाठा पुलिया में उगी जलकुंभी और गाजर घास को सफाई कर्मियों द्वारा तत्काल हटाकर जल प्रवाह को सुचारू बनाया गया। वहीं रामभाठा पुलिया, सीएमएचओ तिराहा पुलिया तथा जूटमिल पुराने बस स्टैंड नाला पुलिया में फँसे कचरे एवं मलबे को जेसीबी मशीनों की सहायता से निकालकर पानी के बहाव को निर्बाध किया गया।
ग्रीन सिटी कॉलोनी में जलभराव की प्रारंभिक स्थिति निर्मित होते ही निगम की टीम मौके पर पहुँची और जेसीबी की सहायता से कृत्रिम नाली बनाकर पानी की शीघ्र निकासी सुनिश्चित की गई। इसी प्रकार बाबूपारा वार्ड क्रमांक-11 में सडक़ किनारे की दीवार ढहकर नाले में गिर जाने से जल प्रवाह बाधित हो गया था। सूचना मिलते ही निगम की आपातकालीन टीम तत्काल मौके पर पहुँची और मलबा हटाकर नाले के जल प्रवाह को पुन: सामान्य किया। निगम प्रशासन द्वारा पूरे मानसून के दौरान कंट्रोल रूम ने तीनों शिफ्ट में कर्मचारियों की टीम की ड्यूटी लगाने के साथ फील्ड अमले, सफाई कर्मियों एवं मशीनरी को निरंतर सक्रिय रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत कार्य किया जा सके।
शहरवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता-आयुक्त
निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय ने कहा कि मानसून के दौरान नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए निगम प्रशासन पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। सभी प्रमुख नालों, पुलिया एवं जलभराव संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है तथा आवश्यक मशीनरी एवं अमले को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि कहीं जलभराव, नाला अवरुद्ध होने अथवा किसी प्रकार की आपात स्थिति दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल निगम के कंट्रोल रूम को दें, ताकि बिना विलंब आवश्यक कार्रवाई की जा सके। आयुक्त श्री क्षत्रिय ने नागरिकों से यह भी आग्रह किया कि नालों एवं जल निकासी मार्गों में कचरा, पॉलीथिन अथवा अन्य अपशिष्ट सामग्री न डालें। नागरिकों के सहयोग से ही शहर की जल निकासी व्यवस्था सुचारू बनी रहेगी और मानसून के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नगर निगम की पूरी टीम पूरे वर्षा काल में नागरिकों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए निरंतर मैदान में सक्रिय रहेगी।
नाले में फंसा मिला कैरेट और बाल्टी
संजय मार्केट से निकलने वाले बड़े नाले में जल भराव होने की सूचना मिली, जिस पर सफाई कामगार लगाकर नाले से मालवा निकाला गया। इस दौरान नाले से सब्जी रखने वाला 2 कैरेट नाले के कल्वर्ट में फंसा मिला, जिसे निकाला गया। यह कैरेट संजय मार्केट के किसी सब्जी व्यवसाई द्वारा नाले में फेंकने की बातें सामने आई। इसी तरह सोनी भवन स्थित रमेश अग्रवाल के यहां से गुजरने वाले नाली से भी पानी निकासी अवरोध हो रही थी वहां भी सफाई कामगार लगाया गया, जहां उनके स्वयं की घर की बाल्टी नाले में फंसी मिली, जिसे निकाला गया और पानी निकासी बहाल किया गया।
रणनीतिक तैयारी से बारिश बनी बेअसर
नगर निगम ने शहर को कोतरा रोड, मुख्य शहर, जूटमिल एवं चक्रधर नगर चार जोनों में विभाजित कर पूर्व से ही जलभराव संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण एवं चिन्हांकन किया। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से बड़े नालों के साथ-साथ गली-मोहल्लों की नालियों की व्यापक सफाई कराई गई तथा जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। परिणामस्वरूप लगातार हुई भारी बारिश के बावजूद नदी एवं बड़े नालों से लगे वार्डों और बस्तियों में भी जलभराव की स्थिति निर्मित नहीं हुई। निगम की पूर्व तैयारी, सतत मॉनिटरिंग और त्वरित जल निकासी व्यवस्था से शहरवासियों को बड़ी राहत मिली।



