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NavinKadam > रायगढ़ > ज्ञानभारतम मिशन के सर्वे में सामने आई 120 वर्ष पुरानी अमूल्य धरोहर
रायगढ़

ज्ञानभारतम मिशन के सर्वे में सामने आई 120 वर्ष पुरानी अमूल्य धरोहर

lochan Gupta
Last updated: May 21, 2026 12:14 am
By lochan Gupta May 21, 2026
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4 Min Read

ग्राम बड़ेभंडार में मिला प्राचीन तालपत्र पांडुलिपियों का दुर्लभ संग्रह
दादा की विरासत को सहेज रहा नंदे परिवार, तालपत्रों में सुरक्षित है धार्मिक-सांस्कृतिक ज्ञान
अधिकारियों ने की संरक्षण कार्य की सराहना, कहा-ऐसी धरोहरें आने वाली पीढिय़ों के लिए अमूल्य निधि

रायगढ़। जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़ेभंडार में भारत सरकार के ज्ञानभारतम मिशन के तहत चल रहे सर्वेक्षण अभियान के दौरान एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर सामने आई है। ग्राम के नंदे परिवार द्वारा लगभग 120 वर्ष पुरानी तालपत्र पांडुलिपियों का संग्रह आज भी सुरक्षित रूप से संरक्षित किया गया है। इन दुर्लभ पांडुलिपियों के मिलने से क्षेत्र की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है। नंदे परिवार के संग्रह में गीता, महाभारत, नित्य पूजन पद्धति, मंगल स्तुति, हरिवंश पुराण, कार्तिक माहात्म्य, माघ माहात्म्य, लक्ष्मी पुराण एवं श्राद्ध पद्धति सहित कुल 25 महत्वपूर्ण पांडुलिपियां संरक्षित हैं।
ज्ञानभारतम मिशन के अंतर्गत प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण हेतु किए जा रहे सर्वे के दौरान सर्वेयर श्री प्रेमचंद मैत्री ने ग्राम पंचायत बड़ेभंडार के सचिव के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर ग्राम निवासी श्री मुरलीधर नंदे एवं उनके भाई श्री मंगल प्रसाद नंदे के निवास पहुंचकर पांडुलिपियों का अवलोकन एवं सर्वेक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि परिवार द्वारा वर्षों से इन प्राचीन तालपत्रों को अत्यंत सावधानी एवं श्रद्धा के साथ संरक्षित किया जा रहा है। श्री मुरलीधर नंदे ने बताया कि उनके परिवार में सुरक्षित यह पांडुलिपियां उनके दादा स्वर्गीय श्री सनातन नंदे द्वारा लिखी गई थीं। तालपत्रों पर उकेरी गई इन पांडुलिपियों में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों का विस्तृत वर्णन है। परिवार द्वारा पीढिय़ों से इनका अध्ययन और संरक्षण किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं अपने दादा से इन पांडुलिपियों का श्रवण और अध्ययन सीखा तथा वर्षों से इन्हें सुरक्षित रखने का कार्य कर रहे हैं।
इन तालपत्रों पर अत्यंत सुंदर एवं कलात्मक ढंग से लेखन और अंकन किया गया है, जो तत्कालीन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण माने जा रहे हैं। परिवार द्वारा प्रतिवर्ष विजयादशमी से कुमार उत्सव पूर्णिमा तक इन पांडुलिपियों की “पोथी स्थापना” कर विधिवत पूजा-अर्चना भी की जाती है। यह परंपरा वर्षों से लगातार चली आ रही है और परिवार अपने पूर्वजों की धरोहर को आज भी उसी श्रद्धा से संजोए हुए है। सर्वेक्षण की जानकारी मिलने पर जनपद पंचायत पुसौर के विकास विस्तार अधिकारी श्री बृज बंधु पटेल भी ग्राम बड़ेभंडार पहुंचे। उनके साथ ग्राम पंचायत के सरपंच श्री ओमप्रकाश गुप्ता तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती पुष्पांजलि दासे भी उपस्थित रहीं। सभी ने नंदे परिवार द्वारा संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया और उनके संरक्षण कार्य की मुक्तकंठ से सराहना की।
विकास विस्तार अधिकारी श्री बृज बंधु पटेल ने कहा कि भारत सरकार का ज्ञानभारतम मिशन देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तालपत्र पांडुलिपियां हमारी ऐतिहासिक धरोहर की अमूल्य निधि हैं और इन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढिय़ों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नंदे परिवार के वर्षों से किए जा रहे संरक्षण कार्य को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे परिवारों के प्रयासों से ही भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान परंपरा जीवित बनी हुई है। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भविष्य में इन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

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