रायगढ़। छत्तीसगढ़ की तपती गर्मी के बीच रायगढ़ इन दिनों राष्ट्रभाव, अनुशासन और संगठन साधना का केंद्र बना हुआ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित “संघ शिक्षा वर्ग दृ तरुण व्यवसायी” का शुभारंभ रायगढ़ के वैदिक इंटरनेशनल स्कूल परिसर में विधिवत रूप से हुआ। 16 मई से 1 जून तक चलने वाले इस विशेष प्रशिक्षण वर्ग में छत्तीसगढ़ के 34 जिलों से आए 107 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं, जिनके मार्गदर्शन के लिए 30 अनुभवी शिक्षक मौजूद हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर मध्य क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, वर्गाधिकारी संजय पांडेय एवं प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में डॉ. सक्सेना ने कहा कि “भारत केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से जीवित एक सांस्कृतिक चेतना है।” उन्होंने आदि शंकराचार्य के चार मठों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर से दक्षिण तक जुड़ी आस्था ही भारत की असली ताकत है। भाषा, पंथ और क्षेत्र अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रभाव एक होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जब-जब समाज जाति और क्षेत्र के नाम पर बंटा, तब-तब देश ने संकट झेला। इसी सोच को बदलने और संगठित समाज निर्माण के उद्देश्य से संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने इस विचार यात्रा की शुरुआत की थी।
वर्ग में रोज सुबह से लेकर रात तक योग, व्यायाम, दंड, समता, गीत, बौद्धिक चर्चा और समूह चिंतन जैसे सत्र आयोजित हो रहे हैं। यहां केवल शारीरिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा का भाव भी तैयार किया जा रहा है। गर्मी भले ही तेज हो, लेकिन शिक्षार्थियों का उत्साह उससे कहीं ज्यादा दिखाई दे रहा है।
कार्यक्रम स्थल पर संघ के शताब्दी वर्ष और “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रजागरण से जुड़ी प्रेरक जानकारियां प्रदर्शित की गई हैं। 1 जून तक चलने वाले इस वर्ग के बाद ये शिक्षार्थी अपने-अपने क्षेत्रों में समाज और राष्ट्रकार्य को नई गति देने के उद्देश्य से सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
तपती गर्मी में राष्ट्रभाव का तप° संघ शिक्षा वर्ग बना संस्कार व संगठन की पाठशाला”



