जीत का जश्न, फिर शहादत की गूंज, मैदान के हीरो बने देश के अमर शहीद
खेल से देशभक्ति तक,चार वीरों की अमर कहानी
जीत की गूंज थमी नहीं थी, शहादत की खबर आ गई
हरण बिसवास/ पखांजुर। क्षेत्र के छोटेबेटिया-धरमपुर से एक ऐसी कहानी सामने आई है,जो गर्व भी देती है और आंखें भी नम कर देती है। शहीद रमेश चंद्र सोलंकी की स्मृति में आयोजित रात्रिकालीन क्रिकेट महाकुंभ में जिन जवानों ने अपने खेल से मैदान में धूम मचा दी, वही अगले ही दिन देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
इस क्रिकेट महाकुंभ में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा, बस्तर फाइटर कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले और कॉन्स्टेबल परमानंद कोर्राम, जगवार इलेवन टीम की ओर से मैदान में उतरे थे।चारों जवानों ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया।उनकी रणनीति, जज्बा और टीम भावना ने जगवार इलेवन को हर मुकाबले में मजबूत बनाया।
फाइनल मुकाबले में इन जवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत दिलाई और जगवार इलेवन को चैंपियन बना दिया। उस रात पूरा छोटेबेटिया-धरमपुर जश्न में डूबा था,तालियों की गूंज,की आवाज और जीत की खुशी हर चेहरे पर साफ झलक रही थी।
लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई,फाइनल जीत के अगले ही दिन,यही चारों जवान अपने कर्तव्य पर लौटे।थाना छोटेबेटिया क्षेत्र के अंतर्गत मार्कबेड़ा, कोरोसकोडो और आदनार के सरहदी इलाकों में सर्च ऑपरेशन, एरिया डॉमिनेशन और डी-माइनिंग अभियान के लिए टीम रवाना हुई।जंगलों में ऑपरेशन के दौरान, जब जवान आईईडी को निष्क्रिय कर रहे थे, तभी अचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ। इस भीषण धमाके ने पल भर में सब कुछ बदल दिया। कर्तव्य निभाते हुए चारों बहादुर जवान शहीद हो गए।
जो जवान एक दिन पहले क्रिकेट मैदान में जीत का जश्न मना रहे थे,वही अगले दिन देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर गए। बता दे नक्सलवाद भले कमजोर पड़ता नजर आ रहा हो,लेकिन जंगलों में छिपे आईईडी और लाल आतंक का खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इन वीर सपूतों की शहादत न सिर्फ उनके परिवारों के लिए, बल्कि पूरे इलाके और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। छोटेबेटिया-धरमपुर की यह कहानी हमेशा याद दिलाएगी कि हमारे जवान सिर्फ सीमा पर ही नहीं, बल्कि हर मोर्चे पर देश की रक्षा करते हुए अपनी जान की बाजी लगा देते हैं।



