रायगढ़। चिकित्सा और तकनीक के संगम ने आज जटिल इलाज को संभव बना दिया है। रायगढ़ स्थित डॉ. आर. पटेल यूरोलॉजी एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (डॉ रूपेन्द्र पटेल हॉस्पिटल) ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता साबित करते हुए एक मरीज का ‘इटीईपी’ पद्धति से सफल लेप्रोस्कोपी हर्निया ऑपरेशन किया है। यह तकनीक न केवल अत्याधुनिक है, बल्कि चुनिंदा अस्पतालों में ही उपलब्ध है।
कुछ दिनों पूर्व एक मरीज पेट में तेज दर्द और सूजन की समस्या लेकर डॉ. आर. पटेल हॉस्पिटल पहुँचा। हमारे विशेषज्ञ ने मरीज की स्थिति को देखते हुए तत्काल सोनोग्राफी करवाई गईं। जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि मरीज ‘हर्निया’ से पीडि़त है। हर्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और अंदरूनी अंग या चर्बी उस कमजोर हिस्से से बाहर आने लगती है। यदि इसका सही समय पर उपचार न हो, तो यह आंतों में रुकावट पैदा कर जानलेवा भी हो सकती है। गौरतलब है की ऑपरेशन के मात्र 24 घंटे के भीतर मरीज चलने-फिरने में सक्षम हो गया और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रिकवरी की यह गति अद्भुत है। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि वे भविष्य में भी इसी तरह की उच्च-तकनीकी सर्जरी के माध्यम से क्षेत्र की सेवा करते रहेंगे। आमतौर पर हर्निया के लिए ‘ओपन सर्जरी‘ की जाती है जिसमें बड़ा चीरा लगता है । लेकिन अस्पताल के संचालक डॉ. अजीत पटेल के कुशल मार्गदर्शन और जनरल सर्जन डॉ. अजय चौधरी की विशेषज्ञता के कारण ‘इटीईपी’ तकनीक को चुना। गौरतलब है कि डॉ अजय चौधरी मिनिमल इनवेसिव में बैंगलोर से ट्रेनिंग प्राप्त है और लैप्रोस्कोपिक की होल सर्जरी के लिए प्रशिक्षित है। यह तकनीक चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। क्योंकि इस प्रक्रिया में सर्जन पेट की परतों के बीच एक कृत्रिम स्थान बनाते हैं। इससे ऑपरेशन के दौरान पेट के अंदरूनी अंगों (जैसे आंतों) को स्पर्श करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे अंगों को क्षति पहुँचने का खतरा शून्य हो जाता है। ‘इटीईपी’ तकनीक के माध्यम से सर्जन को पेट के अंदर बेहतर दृश्य मिलता है, जिससे वे जाली को मांसपेशियों के सबसे सुरक्षित हिस्से में सटीक रूप से फिट कर पाते हैं। इस विधि में मरीज के पेट पर बहुत छोटे छेद किए जाते हैं, जिससे टांके का निशान नहीं रहता और संक्रमण का खतरा भी न के बराबर होता है। इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अस्पताल के संचालक डॉ अजीत पटेल और जनरल सर्जन डॉ. अजय चौधरी ने अपने नेतृत्व में संपन्न किया। उनके साथ उनकी सहयोगी टीम त्रिलोचन पटेल, रामेश्वर मालाकार एवं अन्य और एनेस्थीसिया डॉ आशुतोष अग्रवाल और डॉ अशोक सिंह सिदार विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। टीम के समन्वय के कारण ही इतनी जटिल सर्जरी को बहुत कम समय में सुरक्षित रूप से अंजाम दिया गया।
डॉ रूपेन्द्र पटेल ने बताया कि ‘इटीईपी’ पद्धति से सर्जरी करना तकनीकी रूप से काफी कठिन होता है और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण व अनुभव की आवश्यकता होती है। बहुत कम चिकित्सा केंद्रों में यह सुविधा उपलब्ध है, लेकिन हमें खुशी है कि हमने रायगढ़ के मरीज को यह विश्वस्तरीय उपचार प्रदान किया।
चिकित्सा जगत में रायगढ़ की बड़ी उपलब्धि, डॉ. रूपेन्द्र पटेल हॉस्पिटल में ‘इटीईपी’ तकनीक से हर्निया का सफल ऑपरेशन



