सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़ सिटी कोतवाली के सामने उस समय सनसनी फैल गई जब कोरबा में पदस्थ तहसीलदार बंदे राम भगत न्याय की मांग को लेकर खुलेआम धरने पर बैठ गए। मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि तहसीलदार ने कलेक्टर के गार्ड पर अपने पुत्र राहुल भगत के साथ गाली-गलौज और बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगाया है, लेकिन 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की।
तहसीलदार बंदे राम भगत के अनुसार, 20 जनवरी को उनके पुत्र राहुल भगत के साथ कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ गार्ड ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस हमले में राहुल भगत के कान का पर्दा फट गया, जिसकी चिकित्सकीय पुष्टि भी बताई जा रही है। इसके बावजूद, पीडि़त पक्ष द्वारा बार-बार आवेदन देने के बाद भी सारंगढ़ सिटी कोतवाली पुलिस कार्रवाई के नाम पर टालमटोल करती रही। न्याय न मिलने से आहत तहसीलदार बंदे राम भगत ने मजबूर होकर थाने के सामने धरना देने का कदम उठाया, जिससे पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही आला अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही तहसीलदार का धरना समाप्त हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब एक तहसीलदार को ही एफआईआर दर्ज कराने के लिए भटकना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यह मामला अब केवल एक मारपीट की घटना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर बड़ा सवाल बन चुका है। फिलहाल तहसीलदार बंदे राम भगत सिटी कोतवाली के सामने धरने पर डटे हुए हैं और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दे चुके हैं।
न्याय को तरस रहे तहसीलदार!
सिटी कोतवाली के सामने धरने पर बैठे, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल



