जशपुरनगर। जिले में करोड़पति डीटीओ (डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर) विजय कुमार के घर 5 करोड़ की चोरी हुई है। वारदात की मास्टरमाइंड अफसर की भतीजी मीनल निकुंज समेत 5 आरोपी पकड़े गए हैं, लेकिन 4 आरोपी अभी भी फरार हैं। मामला नारायणपुर थाना क्षेत्र का है।
जशपुर पुलिस के मुताबिक फरार आरोपियों में अविनाश राम प्रधान (27), घनश्याम प्रधान (29), अनमोल भगत (25) और विजय बसंत बड़ाईक (39) शामिल हैं। पुलिस ने वारदात के 45 दिन बाद फरार आरोपियों पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
पुलिस के मुताबिक डीटीओ अफसर विजय कुमार की भतीजी मीनल निकुंज ने बॉयफ्रेंड और साथियों के साथ मिलकर 15 लाख कैश, करीब 4 किलो सोने की चोरी की। इन पैसों से अय्याशी की। आईफोन और कार भी खरीदी। डीटीओ अफसर की भतीजी ने पहले आईफोन खरीदने के लिए 2 लाख चुराए, फिर बर्थडे पार्टी के लिए 3 लाख चुराए। इसके बाद आखिरी बार पूरा सूटकेस ही चुराकर ले आई। सूटकेस में सोने की 1-1 किलो की 2 सिल्लियां थी। 100-150 ग्राम के करीब 15 बिस्किट थे। मीनल वारदात के बाद सूटकेस लेकर साथियों की कार से बॉयफ्रेंड के घर पहुंची। सूटकेस से सोने की सिल्लियां और बिस्किट निकली। इनमें से 4 बिस्किट ओडिशा के राउरकेला में बेचे गए, लेकिन बाकी सोना चोरी हो गया। पकड़े जाने के बाद मीनल निकुंज ने कहा कि उसे अपने ही घर में चोरी करने का पछतावा है। ऐसा नहीं करना चाहिए था।
उल्लेखनीय रहे कि गत् 6 दिसंबर 2025 को डीटीओ विजय कुमार की पत्नी सुषमा निकुंज (52) ने नारायणपुर थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस को बताया कि उनका पुराना पैतृक घर केराडीह में है, जबकि वे वर्तमान में पति और भतीजे के साथ जशपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के शासकीय क्वार्टर में रहती हैं। सुषमा निकुंज ने बताया कि जब वे अपने पुराने घर पहुंचीं। मुख्य दरवाजा खोला, तो अंदर के कमरे का कुंडा टूटा हुआ था। दीवान में रखी अटैची से करीब 15 लाख रुपए कैश, सोने का सिक्का और जेवरात गायब थे। इनकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपए आंकी गई।
पुलिस को गुमराह किया, फिर उगल दिए सारे राज
पुलिस ने डीटीओ विजय कुमार की भतीजी मीनल निकुंज से पूछताछ की। मीनल ने पहले पुलिस को गुमराह किया, लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर सच उगल दिया। मिनल ने स्वीकार किया कि उसने अपने बॉयफ्रेंड अनिल प्रधान के उकसावे पर अपने ही बड़े पिताजी के घर में चोरी की। मीनल निकुंज ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए उसकी दोस्ती अनिल प्रधान से हुई, जो जशपुर में रहकर एक निजी फाइनेंस कंपनी में काम करता था। दोनों की नजदीकियां बढ़ीं और वे लिव-इन में रहने लगे, लेकिन वह ऐशो-आराम की जिंदगी जीना चाहती थी। आईफोन लेना चाह रही थी। इसी बीच मीनल अप्रैल 2025 में अपने गांव केराडीह गई, तो सफाई के दौरान उसे कमरे में दीवान के अंदर एक अटैची मिली, जिसमें भारी मात्रा में नकदी रखी थी। यहीं से अपराध की नींव पड़ी। आईफोन खरीदने के लिए उसने पहली बार 2 लाख रुपए चुपचाप निकाल लिए। मीनल निकुंज ने बताया कि किसी को भनक नहीं लगी, तो लालच बढ़ता चला गया। पहले 2 लाख, फिर 3 लाख और आखिरकार 20 मई 2025 को मिनल ने हद पार कर दी। उसने दादी से कमरे की चाबी चुराई और पूरा सूटकेस स्कूटी से आधे रास्ते तक ले आई, जहां पहले से मौजूद अनिल प्रधान और उसके साथी कार में इंतजार कर रहे थे। चोरी के बाद जब सूटकेस खोला गया, तो उसमें 15 लाख रुपए कैश, सोने के बिस्किट और जेवरात निकले। अगले दिन मीनल का जन्मदिन था। यही पैसा जश्न का जरिया बन गया। चोरी के पैसों से सभी आरोपी रायपुर पहुंचे, जहां एक विला बुक कर दो दिन तक जमकर मौज-मस्ती की।
इस दौरान 5 लाख रुपए से अधिक रकम उड़ाई गई। इसके बाद आरोपी सोने के बिस्किट बेचने राउरकेला (ओडिशा) पहुंचे, जहां उन्हें करीब 8 लाख रुपए मिले। रकम आपस में बांटी गई। बाकी सोना जशपुर के किराए के मकान में छुपा दिया गया। इसी पैसे से करीब मीनल निकुंज ने बताया कि राउरकेला में सोना बेचने के दौरान जशपुर में किराए के कमरे में रखा करीब साढ़े तीन किलो सोना सूटकेस समेत चोरी हो गया। इसी बीच जब परिवार को पूरी घटना का पता चला, तो सभी आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन आखिर में पकड़े गए।



