NavinKadamNavinKadamNavinKadam
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
    • रायगढ़
      • खरसिया
      • पुसौर
      • धरमजयगढ़
    • सारंगढ़
      • बरमकेला
      • बिलाईगढ़
      • भटगांव
    • शक्ति
    • जांजगीर चांपा
    • बिलासपुर
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
Reading: समय से बड़ी कोई संपत्ति नहीं, भक्ति ही मुक्ति का सहज मार्ग : पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी
Share
Font ResizerAa
NavinKadamNavinKadam
Font ResizerAa
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
  • HOME
  • छत्तीसगढ़
    • रायगढ़
    • सारंगढ़
    • शक्ति
    • जांजगीर चांपा
    • बिलासपुर
  • क्राइम
  • आम मुद्दे
  • टेक्नोलॉजी
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • व्यवसाय
  • Uncategorized
Follow US
  • Advertise
© 2022 Navin Kadam News Network. . All Rights Reserved.
NavinKadam > रायगढ़ > समय से बड़ी कोई संपत्ति नहीं, भक्ति ही मुक्ति का सहज मार्ग : पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी
रायगढ़

समय से बड़ी कोई संपत्ति नहीं, भक्ति ही मुक्ति का सहज मार्ग : पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी

lochan Gupta
Last updated: September 5, 2026 11:25 pm
By lochan Gupta September 5, 2026
Share
10 Min Read

रायगढ़। श्याम मंडल द्वारा आयोजित पांच दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव झांकियों का शुभारंभ अत्यंत भक्तिमय और दिव्य वातावरण में अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट, बनोरा के संस्थापक पूज्य पाद अघोर संत बाबा प्रियदर्शी राम जी के करकमलों से सम्पन्न हुआ। मंच पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, श्याम मंडल के पदाधिकारियों एवं सैकड़ों धर्म बंधुओं को पूज्य बाबा जी ने मानव कल्याण से जुड़े विषयों पर आशीर्वचन दिया। अपने आशीर्वचन में पूज्य बाबा जी ने झांकियों से लेकर मानव जीवन के परम सत्य तक, गहराई से प्रकाश डाला।

कृष्ण जन्म से जुड़ी झांकियो को सनातन परंपरा की पाठशाला बताते हुए पूज्य बाबा जी ने श्याम मंडल द्वारा आयोजित कृष्ण जन्माष्टमी की झांकियों को जीवन के लिए भी प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि ये शिक्षा प्रद झांकियां सनातन परंपरा से जुड़ी हुई हैं। इनके जरिए आज की वर्तमान पीढ़ी भगवान कृष्ण की लीलाओं के साथ-साथ भगवान कृष्ण एवं श्याम बाबा के शीश दान जैसे जीवंत और त्याग के प्रसंग को बहुत आसानी से समझ सकती है। मानव देह की देह को स्वर्ग, नर्क और मोक्ष की सीढ़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य ईश्वर की श्रेष्ठ रचना है। लेकिन विडंबना यह है कि ज्ञानवान मनुष्य भी ईश्वर की भक्ति की बजाय भोग-विलास के दलदल में फंसकर पूरा जीवन केवल संचय करने में गंवा बैठता है। यह स्थिति ऐसी ही है जैसे कोई व्यक्ति पारस मणि को फेंक कर कांच के टुकड़ों को उठा ले। समय को जीवन की सबसे मूल्यवान पूंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य धन, संपत्ति, महल, जायदाद एकत्र करने में जीवन का बहुत बड़ा समय खर्च कर देता है। लेकिन जीवन के अंतिम क्षणों में, जीवन भर एकत्र की गई अनमोल संपत्ति के बदले वह अपनी जिंदगी का एक पल भी नहीं खरीद सकता। समय को लगाकर हासिल की गई संपत्ति के जरिए वापस समय को नहीं पाया जा सकता। समय के सदुपयोग से ही मुक्ति अर्थात मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है, वहीं समय के दुरुपयोग से नर्क का मार्ग प्रशस्त होता है। मृत्यु को जीवन का अंतिम सत्य बताते हुए परमात्मा से रिश्ता जोडऩे की बात भी उन्होंने कही। हाल में नेपाल की त्रासदी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि आप सभी ने देखा कैसे जन्म के साथ बने बहुत से बहुत से रिश्ते एक पल में बिखर गए। उन्होंने जीवन का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु को बताया। मनुष्य यह जानता है कि सारे रिश्ते एक दिन पीछे छूट जाएंगे, उसके बाद भी वह परमात्मा से रिश्ता नहीं जोड़ पाता। उन्होंने कहा कि श्याम बाबा से जुड़े लोग पूरी निष्ठा से श्याम बाबा से रिश्ता जोड़ सकते है। यही जीवन के कल्याण का श्रेष्ठतम उपाय है। परमात्मा को जीवन का मुखिया मान लेने से हर दुख का निवारण आसानी से हो सकता है। पूज्य बाबा जी ने कहा परोपकार को अहंकार रहित होना चाहिए।मनुष्य को सदैव दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहना चाहिए, लेकिन मदद करते समय ही अहंकार का भाव पैदा हो जाता है। अहंकारी मनुष्य यह भूल बैठता है कि मदद करने की यह शक्ति भी परमात्मा से मिली हुई है। परोपकार करने वाला मनुष्य जब ईश्वर से मिली शक्ति को भूलकर अहंकारी हो जाता है, तो वह लोभ, मोह, ईर्ष्या, घृणा और संचय के दलदल में फंसकर मोक्ष की बजाय खुद के लिए नर्क का मार्ग प्रशस्त कर लेता है। इसलिए परोपकार की भावना अहंकार रहित होनी चाहिए। नश्वर संसार में अहंकार से मुक्ति के लिए ईश्वर भक्ति को सहज मार्ग बताया। भक्ति ही ईश्वर से जुडऩे का सरल माध्यम है जो हमें सांसारिक कष्टों से मुक्ति दिला सकता है। ईश्वर को जानने-समझने की इच्छा से ही भक्ति का भाव पैदा होता है। प्रेम और भक्ति ऐसा पवित्र जल है जिससे अंत:करण को शुद्ध किया जा सकता है। मनुष्य का भ्रम ही ईश्वर की ओर जाने में बाधक है। साठ वर्ष के बाद का समय वानप्रस्थ का माना गया है। धन संचय की सीमा खत्म हो जाती है इसके बाद का समय परोपकार सेवा का समय होता है। जीवन के साठ साल बाद वानप्रस्थ जीवन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में हर मनुष्य को निश्चित मात्रा में ही धन अर्जित करना चाहिए। साठ वर्ष की आयु के बाद वानप्रस्थ जीवन जीते हुए सेवा करनी चाहिए। यह उम्र सेवा, परोपकार और ईश्वर की भक्ति के लिए सुनिश्चित की गई है। धन से सुख-शांति हासिल नहीं की जा सकती। बाहर से धनाढ्य दिखने वाला व्यक्ति अंदर से अशांति और तनाव भरा जीवन जीता है, क्योंकि असीमित धन कमाने की लालसा ही जीवन में अशांति लाती है। धन उपार्जन के लिए भी शील और शालीनता के मार्ग का अनुसरण आवश्यक है, और इस अर्जित धन को परोपकार में ही खर्च करना चाहिए, तभी मनुष्य जीवन का कल्याण संभव है। आत्म कल्याण हेतु शांति का मार्ग बताते हुए उन्होंने कहा परमात्मा ने मनुष्य का जीवन केवल धन संचय के लिए नहीं दिया है। मनुष्य जिस शांति की तलाशबाहर करता है, वह शांति उसके अभ्यंतर में ही मौजूद है। सभी मनुष्य के अंदर परमात्मा का अंश मौजूद है, उसकी शक्ति को जाने बिना मनुष्य का कल्याण संभव नहीं है। आत्मकल्याण के लिए भी ईश्वर भक्ति आवश्यक है, क्योंकि वही जीवन के सभी क्लेशों को मिटा सकती है। गीता के कर्मयोग का जिक्र करते हुए जन कल्याण को सच्चा कर्म योग बताया। गीता के कर्मयोग की व्याख्या करते हुए पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने कहा कि कर्म तो सभी करते हैं, लेकिन ऐसा कर्म जिससे जन कल्याण होता है,वही कर्मयोग बन जाता है। मनुष्य को खुद को पहचानने की आवश्यकता है। वह अपनी पहचान नश्वर शरीर से जोडऩे की वजह से अपने आत्मा स्वरूप को भूल जाता है। धनाढ्य वर्ग द्वारा जन्मदिन और सालगिरह मनाने को उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों में धन का अपव्यय करने की बजाय गरीब बच्चियों की शादी करवाने का संकल्प लेना चाहिए। खुद पर खर्च किया धन केवल शारीरिक सुख दे सकता है, वहीं दूसरों के कल्याण के लिए खर्च किया धन आत्मिक सुख का कारण बन जाता है। निष्काम सेवा से ही अंत:करण शुद्ध होने की बात भी कही। निष्काम भाव से परोपकार किए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि परोपकार करना हर मनुष्य का कर्तव्य होना चाहिए। नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा से ही चित्त, मन एवं अंत:करण शुद्ध होता है। छल-कपट रहित निर्मल मन वाले मनुष्य ही ईश्वर को प्रिय होते हैं। परोपकार और सेवा की भावना से किए गए कर्म ही ईश्वर प्राप्ति का जरिया बन जाते हैं। व्यर्थ में खर्च की गई धन राशि कुछ समय के लिए व्यक्तिगत संतुष्टि दे सकती है, लेकिन वही राशि परोपकार में खर्च की जाए तो वह जीवन भर के आत्मिक संतोष का कारण बन जाती है। निस्वार्थ सेवा से मिलने वाला आत्मिक संतोष धन से नहीं खरीदा जा सकता। यही संतोष मनुष्य को सांसारिक मोह-माया के बंधन और लोभी होने की प्रवृत्ति से रोक सकता है। अंत में धर्म की हानि होने पर भगवान के धरती पर प्रकट होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब अन्याय बढ़ा, ईश्वर कभी राम बनकर तो कभी कृष्ण बनकर प्रकट हुए, उन्होंने न केवल धर्म की रक्षा की बल्कि शांति और प्रेम का संदेश भी स्थापित किया। उन्होंने ईश्वर के सभी रूपों के प्रति आदर करने का आग्रह किया।

धन भोग पाओ या ना भोग पाओ कर्म फल जन्म जन्मान्तर भोगना पड़ेगा : बाबा प्रियदर्शी राम जी

केवल धन संचय में अपना पूरा जीवन खपाने वाले लोगों को बाबा प्रियदर्शी राम जी ने कहा जीवन भर अर्जित की गई धन संपदा भोग पाओ या ना पाओ लेकिन इस अर्जित करने के लिए किए कर्मों का फल से जन्म जन्मांतर तक पीछा नहीं छूटेगा। इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि प्रत्येक कर्म सुचिता के साथ होना चाहिए।

You Might Also Like

साउथ बिहार ट्रेन में लाखों के सोने चांदी से भरा बैग एसी बोगी में छूटा

श्रद्धांजलि अर्पित कर डाक्टर दूलीचंद को कर रहे याद

कपट पूर्वक जमीन बिकवाकर फर्जी कंपनी में कराया निवेश

ओ.पी. जिंदल स्कूल में ‘माइंड स्पार्क’ विज्ञान और तकनीकी प्रदर्शनी का हुआ आयोजन

आदर्श आचार संहिता लगते ही चौक चौराहों से हटाए गए बैनर पोस्टर

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email
Previous Article आर.एल. हॉस्पिटल में 6 को ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ सुनील गौनियाल रहेंगे उपलब्ध
Next Article ज्ञान के प्रकाशपुंजों का हुआ भव्य अभिनंदन, गौरव सम्मान से सुशोभित हुए शिक्षक

खबरें और भी है....

दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है : सीएम साय
झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में एनआईए कोर्ट ने सुनाया फैसला, 10 आरोपी पाए गए दोषी
2015 से 2026 तक स्वीकृत कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस भूमि की जांच शुरू,… कॉलोनाइजरों पर जिला प्रशासन का बड़ा एक्शन
चिटफंड कंपनी का फरार डायरेक्टर जशपुर से गिरफ्तार
कोड़ातराई में सवा करोड़ की लागत से बनेगा पीएम श्री स्कूल भवन

Popular Posts

डेंगू से निपटने निगम और स्वास्थ्य की टीम फील्ड पर,पिछले 5 साल के मुकाबले इस साल केसेस कम, फिर भी सतर्कता जरूरी
जहां रकबे में हुई है वृद्धि पटवारियों से करवायें सत्यापन-कलेक्टर श्रीमती रानू साहू,मांग अनुसार बारदाना उपलब्ध कराने के निर्देश
दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है : सीएम साय
मेगा हेल्थ कैंप का मिला फायदा, गंभीर एनीमिया से पीड़ित निर्मला को तुरंत मिला इलाज
स्कूल व आंगनबाड़ी के बच्चों का शत-प्रतिशत जारी करें जाति प्रमाण पत्र,कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने बैठक लेकर राजस्व विभाग की कामकाज की समीक्षा

OWNER/PUBLISHER-NAVIN SHARMA

OFFICE ADDRESS
Navin Kadam Office Mini Stadium Complex Shop No.42 Chakradhar Nagar Raigarh Chhattisgarh
CALL INFORMATION
+91 8770613603
+919399276827
Navin_kadam@yahoo.com
©NavinKadam@2022 All Rights Reserved. WEBSITE DESIGN BY ASHWANI SAHU 9770597735
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?