रायपुर। राजधानी रायपुर के गुढिय़ारी थाने में सोमवार को जब्त सामान के रखरखाव और रिकॉर्ड प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए ‘ई-मालखाना’ प्रणाली की शुरुआत की गई। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला और एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले ने इसका शुभारंभ किया।
पुलिस का दावा है कि नई व्यवस्था से जब्त सामान की निगरानी, रिकॉर्ड और ट्रैकिंग पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। यह प्रणाली डीसीपी नॉर्थ जोन मयंक गुर्जर के मार्गदर्शन में गुढिय़ारी थाना प्रभारी बीएल चंद्राकर और मालखाना स्टाफ के संयुक्त प्रयास से विकसित की गई है। शुभारंभ के दौरान अधिकारियों को ई-मालखाना की कार्यप्रणाली का डेमो भी दिखाया गया। इसमें डिजिटल पंजीयन, बारकोड आधारित पहचान, रैकवार स्टोरेज और रिकॉर्ड ट्रैकिंग की पूरी प्रक्रिया समझाई गई। इस मौके पर डीसीपी वेस्ट संदीप पटेल, एडिशनल डीसीपी आकाश मरकाम, सहायक पुलिस आयुक्त पूर्णिमा लामा समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस उपायुक्त मयंक गुर्जर ने बताया कि ई-मालखाना लागू करने से पहले थाने में रखे सभी जब्त सामान का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके बाद मालखाने को वैज्ञानिक तरीके से रैकवार व्यवस्थित किया गया। सामान को ए1, ए 2, बीव्ही, बी 2 जैसी श्रेणियों में रखा गया, ताकि जरूरत पडऩे पर उसकी लोकेशन तुरंत पता चल सके।
हर जब्त वस्तु पर बारकोड लगाया गया है और उसका सॉफ्टवेयर के जरिए डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इससे अब सामान जमा करने, निकालने और खोजने की प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार ई-मालखाना व्यवस्था शुरू करने वाला गुढिय़ारी थाना शहर का दूसरा थाना है। इससे पहले कोतवाली थाना में ई-मालखाना व्यवस्था शुरू हो चुकी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में तकनीक के इस्तेमाल और अभिलेख प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में का यह मॉडल भविष्य में अन्य थानों में भी लागू किया जा सकता है। ई-मालखाना सिस्टम में हर जब्त सामान का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। इसी पूरे प्रोसेस को ही चेन ऑफ कस्टडी कहा जाता है, जो किसी भी केस में सबूत की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बारकोड तीन अलग-अलग जगहों पर लगाए जा रहे हैं। पहला जब्त माल पर, जब्ती पत्रक और मालखाना रजिस्टर में। मकसद यह है कि जब्त सामान से जुड़ी हर जानकारी आपस में डिजिटल तरीके से लिंक रहे और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति न बने। यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। बारकोड सीधे उस सामान पर लगाया जाएगा जो पुलिस ने जब्त किया है। इसका फायदा ये है कि सामान की तुरंत पहचान हो जाएगी। स्कैन करते ही केस नंबर, जब्ती तारीख और वर्तमान लोकेशन दिख जाएगी। एक जैसे सामान में भ्रम नहीं होगा। कोर्ट में पेश करने या वापस करने में आसानी होगी। उदाहरण के तौर पर अगर 20 मोबाइल जब्त हुए हैं, तो हर मोबाइल का अलग बारकोड होगा।
जब्ती पत्रक वह कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें लिखा रहता है कि कौन सा सामान कब और कहां से जब्त किया गया। इसमें बारकोड लगाने का फायदा ये है कि दस्तावेज और असली सामान आपस में लिंक हो जाएंगे। स्कैन करते ही संबंधित जब्त माल की जानकारी खुल जाएगी। कोर्ट या जांच के दौरान रिकॉर्ड मिलान तेजी से होगा। फर्जी बदलाव या रिकॉर्ड गड़बड़ी की संभावना घटेगी। यानी अगर अधिकारी जब्ती पत्रक स्कैन करे, तो उसे सीधे उसी सामान का डिजिटल रिकॉर्ड मिल जाएगा। मालखाना रजिस्टर वह रिकॉर्ड होता है, जिसमें जमा और निकासी की एंट्री होती है। इसमें बारकोड लगाने का फायदा रजिस्टर और डिजिटल सिस्टम का सिंक्रोनाइजेशन रहेगा। कौन सा सामान कब जमा हुआ और कब निकला, यह तुरंत ट्रैक होगा ऑडिट और निरीक्षण आसान होगा ‘चेन ऑफ कस्टडी’ मजबूत होगी। यानी रजिस्टर स्कैन करते ही पता चल जाएगा कि संबंधित सामान अभी मालखाने में है, कोर्ट गया है या जांच एजेंसी के पास है।
गुढिय़ारी थाने में शुरू हुआ ई-मालखाना, सोना-चांदी, ड्रग्स से लेकर हर जब्त सामान पर यूनिक बारकोड, रिकॉर्ड रहेगा पूरी तरह डिजिटल



