रायगढ़। धरमजयगढ़ क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत पौधारोपण कार्य किए गए, जिनमें पौधों की सुरक्षा के लिए लगभग 350, 270 रुपये प्रति नग की लागत से ट्री गार्ड लगाए गए। जिसका सप्लाई डमरूधर गुप्ता, रोहित साहू और अन्य कई लोंग करते है। लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर ट्री गार्ड टूटे-फूटे हालत में पड़े हैं, कहीं तार उखड़ चुका है तो कहीं लकड़ी का ढांचा ही जमीन पर गिरा दिखाई दे रहा है। जहा 400 नग का भुगतान होता है वहा 400 नग गिनती में मौजूद नहीं मिलते। यह हाल एक जगह का नहीं अधिकारी हर ग्राम पंचायत का इस मामले की जांच करें सच्चाई सामने आ जाएगा हालत ऐसी हो चुकी है कि लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं। जो खुद सुरक्षा मांग रहा है, वह पौधों की रक्षा क्या करेगा?
मिली जानकारी के अनुसार इस कार्यों का बिल भुगतान लगभग 4 से 5 महीने पहले ही हो चुका है, लेकिन यदि कार्यस्थलों का निरीक्षण किया जाए तो बड़ी संख्या में खराब और बेकार हो चुके ट्री गार्ड दिखाई पड़ सकते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सामग्री की गुणवत्ता बेहद कमजोर रखी गई और केवल कागजों में काम पूरा दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर भुगतान से पहले संबंधित कर्मचारियों ने गुणवत्ता जांच की थी या नहीं? यदि जांच हुई थी तो इतनी निम्न स्तर की सामग्री को स्वीकृति कैसे मिल गई?
मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास है, लेकिन धरमजयगढ़ क्षेत्र में जिस प्रकार से कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जनता अब मांग कर रही है कि संबंधित पंचायतों में लगाए गए ट्री गार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और गुणवत्ता में गड़बड़ी पाए जाने पर सप्लायर पर कड़ी कार्यवाही की जाए। क्योंकि यदि ऐसे मामलों पर जांच नहीं होती, तो यह सीधे-सीधे सरकारी राशि की बर्बादी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा माना जाएगा।
350 और 270 रुपये का ट्री गार्ड खुद मांग रहा सुरक्षा
धरमजयगढ़ क्षेत्र में मनरेगा के पौधारोपण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार



