सुकमा। गणेश चतुर्थी के अवसर पर जब समूचा भारत ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंज रहा है, ऐसे समय में सुकमा में एक अनूठी मिसाल कायम हुई। बस्तर क्षितिज सामाजिक सेवा समिति द्वारा लगातार पाँचवें वर्ष यहाँ निशुल्क गणेश प्रतिमाओं का वितरण किया गया। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और सामाजिक सेवा का जीवंत उदाहरण भी है। इस पुनीत कार्य की सूत्रधार हैं अधिवक्ता दीपिका शोरी, जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य भी हैं। दीपिका शोरी सामाजिक, सांस्कृतिक और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि जब मैंने यह कार्य प्रारंभ किया था, तब कुछ ही लोगों का साथ था, परंतु आज समाज का सहयोग और सहभागिता देखकर यह विश्वास और प्रबल हुआ है कि सनातन संस्कृति में लोगों की आस्था और विश्वास दिनोंदिन बढ़ रहा है।
उन्होंने सुकमा में कुछ लोगों के द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाए जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। कहा यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज कुछ लोग सनातन धर्म और उसके प्रतीकों को केवल राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का साधन बना रहे हैं। परंतु उन्हें यह समझना होगा कि सनातन कोई हाल ही में उपजा विचार नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही संस्कृति है। इसे न तो कोई मिटा सकता है, और न ही किसी के चाहने से इसकी आस्था कमजोर होती है। सभी को अपने अपने रीति रिवाजों के अनुसार पूजा पद्धति का अधिकार है परंतु यहां अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने वालों से कहना चाहती हूँ कि आप हिन्दू देवी देवताओं की पूजा का विरोध करते हैं और चुनाव नजदीक आते ही उन्ही हिन्दू इष्टदेवों के कार्यक्रमों की विभिन्न समाजों के मंच साझा कर गुणगान करने से पीछे नहीं हटते हैं सनातन वह पुरानी संस्कृति है जो मुगल काल में मुगलों के आतंक के बाद भी नहीं मिटा इसे मिटाने वाले ही मिट गए हमारे कितने ही पूर्वज सनातन संस्कृति की रक्षा करते हुए मुगलों के आगे झुकने से मना कर दिया और सपने प्राणों की आहुति दे दी,मैं भी अपने उन्हें पूर्वजों के पदचिन्हों पर चल कर सनातन संस्कृति हेतु न्योछावर हो जाना चाहती हूं और इस हेतु मुझसे जो भी सम्भव होगा मैं करुंगी।
बस्तर क्षितिज सामाजिक सेवा समिति की संस्थापिका जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के सदस्य की भी जिम्मेदारी में है उन्होंने कहा कि हम अपने क्रम को निरन्तर जारी रखते हुए अपनी समिति के माध्यम से श्री गणेश स्थापना के अवसर पर विभिन्न ग्राम पंचायत से आये हुए हमारे आदिवासी भाई बहनों के साथ साथ अन्य समाज के लोगों को श्री गणेश जी की प्रतिमा का नि:शुल्क वितरण किया,मुझे यह बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि हमारा प्रयास आज सफलता की ओर है और प्रतिवर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक लोगों ने श्री गणेश जी की प्रतिमा प्राप्त की हैं जिनमें प्रमुख रूप से नक्सलप्रभावित ग्राम पेंदलनार, कुण्दनपाल, बाडऩपाल, सौतनार, उरमापाल, किकिरपाल, अधिकारीरास, गादीरास, पाकेला, हिकमीरास, छिंदगढ़ व अनेकों ग्राम शामिल हैं, इस आयोजन में वितरित की गई गणेश प्रतिमाएं स्थानीय कलाकारों द्वारा पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बनाई गई थीं, जिससे न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान हुआ, बल्कि स्थानीय कारीगरों को भी रोजगार का अवसर मिला।
इस प्रकार, यह आयोजन केवल मूर्ति वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक मजबूत सांस्कृतिक संदेश के साथ समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता दिखा। प्रतिमा वितरण के दौरान सुकमा के गणमान्य नागरिकों के साथ समिति के कोषाध्यक्ष संजय सिंह भदौरिया सहयोगी बामन राम,अंजली साहू भी उपस्थित रहे।
गणेश उत्सव बना सनातन चेतना का पर्व बस्तर क्षितिज समाजिक सेवा समिति का अभिनव पहल
विगत पांच वर्षों से समिति की संस्थापिका दीपिका अपने सहयोगियों के साथ नि:शुल्क वितरित कर रही गणेश जी की प्रतिमाएं
