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रायगढ़

बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट रिजल्ट का लक्ष्य लेकर करें नए सत्र की शुरुआत- कलेक्टर

lochan Gupta
Last updated: June 19, 2025 12:33 am
By lochan Gupta June 19, 2025
6 Min Read

रायगढ़। स्कूलों में परीक्षा परिणामों को बेहतर करना शिक्षा विभाग का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है। इसमें जिला स्तर के साथ ही ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। नए शिक्षा सत्र के शुरू होने के साथ ही अब शिक्षा का स्तर और रिजल्ट बेहतर करने के लिए एक रोडमैप के साथ काम किया जाए। यह बातें कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने आज शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कही। सीईओ जिला पंचायत श्री जितेन्द्र यादव भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में परीक्षा परिणामों की विस्तार से समीक्षा की गई। विशेष रूप से 10 वीं और 12 वीं के परीक्षा परिणामों पर फोकस किया गया। रायगढ़ ब्लॉक में 12 वीं के परिणाम की तुलना में 10 वीं के कमजोर रिजल्ट पर चर्चा करते हुए कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने कहा कि शहरी स्कूलों में सारे सुविधा संसाधन है, फिर भी यहां परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सभी बीईओ इस पर ध्यान दें। जो बच्चे फेल हुए हैं, उनसे बात कर खराब परिणामों के कारण जानने की कोशिश करें। जरूरी नहीं सभी अनुत्तीर्ण बच्चे पढ़ाई में कमजोर हों, यदि कोई दूसरे कारण हों तो उसकी पड़ताल करें, ताकि रिजल्ट बेहतर करने के लिए जरूरी पहल की जा सके। इससे इन बच्चों का मनोबल भी बढ़ेगा और आगे पढ़ाई में अच्छा कर सकेंगे। उन्होंने स्कूल ड्रॉप आउट और एब्सेंट रहे बच्चों पर विशेष रूप से ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा कि लड़कियों के परिणाम बेहतर हैं। लडक़े ड्रॉपआउट ज्यादा कर रहे हैं। इसकी भी जानकारी इक_ी करें और ड्रापआउट कम करने के लिए कार्ययोजना बनाते हुए काम करें। कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने युक्तियुक्तकरण के पश्चात स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना, ज्वाइनिंग और पढ़ाई-लिखाई के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशानुसार तय समय सारणी के अनुसार नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन होना चाहिए।
बैठक में इस साल के लिए विभाग द्वारा बनाई गई कार्ययोजना पर चर्चा की गई। सीईओ जिला पंचायत श्री जितेन्द्र यादव ने बच्चों के मासिक टेस्ट और उत्तर लेखन पर भी बल दिया। इसके साथ ही नियमित रूप से क्विज और स्पीच कॉम्पिटिशन करवाने के निर्देश देते हुए कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि किताबी पढ़ाई-लिखाई के साथ खेलकूद और जानवर्धक गतिविधियों से उन्हें जोड़ा जाए। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनका व्यक्तित्व निखरेगा। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.के.वेंकट राव, डीएमसी श्री नरेन्द्र चौधरी, सहायक संचालक शिक्षा सुश्री तरसीला एक्का, जिला परियोजना अधिकारी साक्षर भारत श्री देवेन्द्र वर्मा, एपीसी श्री भुवनेश्वर पटेल एवं श्री भूपेन्द्र चौहान सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने प्राइवेट स्कूलों के परीक्षा परिणामों के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिन प्राइवेट स्कूलों के रिजल्ट 50 प्रतिशत से कम हैं, उसकी जांच करें। देखें क्या कमी है। जो बच्चों से फीस लेकर भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं उनके विरुद्ध आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाएं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर करें काम
कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में बच्चों की तैयारी को लेकर विभाग द्वारा की जा रही पहल के बारे में जाना। जिला शिक्षाधिकारी ने बताया कि हर ब्लॉक से विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का चयन कर उन्हें कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कराने वाले टीचर्स से ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। जिसके बाद वे अपने ब्लॉक में बच्चों की तैयारी करवाएंगे। कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने कहा कि दूसरे बच्चे पूरे साल मेहनत कर इन परीक्षाओं में बैठते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि जल्द शिक्षकों की ट्रेनिंग पूरी कर बच्चों की तैयारी अभी से शुरू की जाए, ताकि वे साल के अंत तक प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने बच्चों के नियमित मॉक टेस्ट अनिवार्य रूप से लेने के लिए कहा।
मिशन मोड में बनवाएं जाति-आय-निवास प्रमाण पत्र
नव प्रवेशित बच्चों के साथ पहले से छूटे छात्रों के जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र मिशन मोड में बनाने के निर्देश कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने बैठक में दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग आपस में समन्वय कर लें। स्कूल स्तर पर बच्चों में सभी जरूरी दस्तावेज इक_े कर संबंधित पटवारी आरआई के माध्यम से तहसील में भेज दिए जाएं। ताकि जल्द सारी प्रक्रियाएं पूर्ण कर प्रमाण पत्रों का निर्माण और वितरण किया जा सके।
नियमित स्वास्थ्य जांच है जरूरी
कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने स्कूलों में बच्चों के नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला शिक्षाधिकारी से कहा कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय करते हुए स्कूलों में हेल्थ चेकअप के लिए रोस्टर बनवा लें। ताकि शिक्षकों को पहले से पता हो उनके विद्यालय में मेडिकल टीम कब आएगी, ताकि उस दिन सभी छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

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