रायगढ़। जिंदल स्टील ने देश के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने फैक्ट्रियों से निकलने वाले स्टील कचरे (स्टील स्लैग) का 100 प्रतिशत इस्तेमाल करके 1.85 किलोमीटर लंबी 4-लेन सडक़ बनाई है। पूरी तरह से प्रोसेस किए गए स्टील स्लैग से बनी यह दुनिया की सबसे लंबी सडक़ है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है। शनिवार को इस सडक़ का उद्घाटन नयी दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह एवं जिंदल स्टील लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने ऑनलाइन किया।
कचरे से कंचन (वेस्ट टू वेल्थ) का सपना साकार करने वाली इस सडक़ के निर्माण में लगभग 2 लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल हुआ है। इससे प्राकृतिक पत्थरों की खुदाई और खनन पर निर्भरता खत्म हुई है। यह सडक़ सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि भारी कमर्शियल गाडिय़ों (ट्रक आदि) की आवाजाही को ध्यान में रखकर बेहद मजबूत बनाई गई है। इससे पैसे और संसाधनों की बचत होगी। पारंपरिक सडक़ों के मुकाबले यह सडक़ लगभग 35 प्रतिशत पतली है और इसे बनाने में करीब 40 प्रतिशत लागत की बचत हुई है। जिंदल स्टील ने सीएसआईआर और सडक़ अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर इस स्लैग को वैज्ञानिक प्रक्रिया (क्रशिंग, मेटल निकालना और ग्रेडिंग) के जरिए सडक़ बनाने लायक पत्थरों में बदला और सडक़ की सबसे निचली परत से लेकर ऊपरी डामर (बिटुमिन) की परत तक इसी का इस्तेमाल किया। सभी कड़े पर्यावरणीय परीक्षणों के बाद ही इसे मंजूरी दी गई है।
जिन्दल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इस अवसर पर कहा कि भारत की तरक्की ऐसे नए प्रयोगों से होनी चाहिए जो पर्यावरण को बचाते हुए देश को फायदा पहुंचाएं। यह तकनीक दिखाती है कि कैसे उद्योग का कचरा देश निर्माण का जरिया बन सकता है।
स्वदेशी तकनीकी देश के लिए गौरव-केंद्रीय मंत्री जितेंद्र ङ्क्षसह
डॉ. जितेंद्र सिंह (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री) ने कहा कि यह प्रोजेक्ट ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से संपत्ति) के सपने को साकार करता है। यह साबित करता है कि हमारी स्वदेशी तकनीक से देश की बड़ी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है। जिंदल स्टील ने इस प्रोसेस्ड स्लैग का नाम स्टील ग्रिट रखा है। इसका लोगो आज लोकार्पित किया गया। इस तकनीक को देश भर में बाकी सडक़ों के निर्माण में इस्तेमाल करने के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इस्पात संयंत्रों से निकलने वाले स्लैग का उच्च गुणवत्ता वाली सडक़ निर्माण में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करने वाली इस मील का पत्थर परियोजना का निर्माण जिंदल सीमेंट परियोजना स्थल को नेशनल हाइवे-49 से सीधे जोडऩे के लिए किया गया है। परियोजना के दौरान देश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने निरंतर दौरा कर इसका निरीक्षण किया एवं महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विगत दिनों गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकाड्र्स की टीम ने भी रायगढ़ का दौरा कर स्थल का मुआयना किया। शनिवार को उद्घाटन समारोह के दौरान जिंदल स्टील लिमिटेड रायगढ़ के समस्त अधिकारी-कमर्चारी ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।



