रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली गिरफ्तारी की है। ईडी ने अभनपुर निवासी कारोबारी जयप्रकाश गांधी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने 3 जून को आरोपी को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रायपुर में पेश किया, जहां से उसे पूछताछ के लिए तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। ईडी ने यह जांच छत्तीसगढ़ एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। मामला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। ईडी की जांच में पता चला कि जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर, अधिसूचित हाईवे अलाइनमेंट (सीध) के दायरे में आने वाली जमीन को अधिग्रहित किया और बाद में उसे 500 वर्ग मीटर से कम माप वाले छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया। आरोप है कि जमीन का यह बंटवारा सिर्फ इस इरादे से किया गया था ताकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से ज्यादा मुआवजा हासिल किया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि धोखाधड़ी के इस तरीके को अपनाकर, आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों ने लगभग 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा हासिल किया, जबकि उन्हें कानूनी तौर पर सिर्फ 56.76 लाख रुपये ही मिलने चाहिए थे। इस तरह उन्होंने लगभग 9.27 करोड़ रुपये की ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ जमा कर ली। जांच में आगे यह भी पता चला है कि इस ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ को बाद में शेयरों, म्यूचुअल फंडों और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करके अलग-अलग चरणों में खपाया और वैध संपत्ति के रूप में मिला दिया गया।इस मामले में ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान मुआवजे की धोखाधड़ी से प्राप्ति से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत बरामद कर जब्त किए गए थे। सबसे पहले ईडी की टीम ने जयप्रकाश गांधी के अलावा उसके भाई गोपाल गांधी और सत्यप्रकाश गांधी के ठिकानों पर भी जांच की थी। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई। इससे पहले ईडी ने मामले के मुख्य आरोपी हरमीत सिंह खनूजा समेत खेमराज कोसले, पुनउराम देशलहरे और कुंदन बघेल के खिलाफ विशेष न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि जमीन खरीद, नामांतरण और मुआवजा भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर कर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रायपुर में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने उसे पूछताछ के लिए तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। ईडी के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और इस कथित साजिश में शामिल अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों तथा सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ऐसे में और भी नाम सामने आ सकते हैं।



